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असम: बांग्लादेशी घुसपैठियों के साथ एक आतंकी दल भी है, आप नहीं जानते होंगे!

नई दिल्ली: इन दिनों असम में एनआरसी के अंतिम मसौदों को लेकर देश में भारी हंगामा मचा है। एनआरसी की लिस्ट में अमस में रह रहे 40 लाख लोगों को भारतीय नागरिक नहीं माने जाने को लेकर मौजूदा केंद्र सरकार विपक्ष के निशाने पर हैं। बताया जाता है कि जिन लोगों के नाम एनआरसी में नहीं है उनमें से अधिकांश बांगलादेशी हैं जो घुसपैठ कर भारत में रह रह हैं।

दावा किया जाता है कि है कि असम बांगलादेशियों का घुसपैठ पिछले काफी दिनों से जारी है और हाल के दिनों में भी लोग भारत में घुसपैठ करने की राह देख रहे हैं। इन सभी चर्चाओं के बीच कई लोग ऐसे भी हैं जो घुसपैठ कर भारत में रह रहे बांगलादेशियों को यहां रहने देने की वकालत कर रहे हैं।

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वहीं कुछ लोगों का आरोप है कि बांगलादेशी घुसपैठिये न सिर्फ भारत में रह रहे हैं बल्कि भारतीय का हक मारने के साथ-साथ यहां अशांति और आतंकी गतिविधियों में भी लिप्त हैं। ऐसा ही एक संगठन हैं मुस्लिम यूनाईटेड लिबरेशन टाइगर्स ऑफ असम। जिसकों लेकर दावा किया जाता है कि इसके अधिकांश सदस्य बांगलादेशी हैं जो भारत में घुसपैठ कर आए हैं और यहां सेना और आम जन को नुकसान पहुंचा रहे हैं।

इसे असम में MULTA नाम से जाना जाता है, जिसके बारे में शायद आप अब तक कुछ भी न जानते हो, क्योंकि इसे अक्सर नजरअंदाज किया जाता था। मुस्लिम यूनाईटेड लिबरेशन टाइगर्स ऑफ असम इस्लामिक चरम पंथियों का एक घातक और खतरनाक संगठन है जो 1996 में आसाम में बना। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार दावा किया जाता है कि इस आतंकी समूह को भी पाकिस्तान की इंटर सर्विसेज इंटेलिजेंस यानी ISI  का पूरा सहयोग प्राप्त है।

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भारत की सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार यह आतंकी संगठन पूरे आसाम और इसके आस पास के निकट प्रदेशों में अपनी आतंकी और व् आपराधिक गतिविधियों को अंजाम देता रहा है। इस आतंकी संगठन का मुख्य केंद्र असम का धुबरी क्षेत्र है जहां बंग्लादेशी घुसपैठिये की काफी तादाद है। यह संगठन नौगांव, मोरीगांव और दरांग जिलों में भी सक्रिय बताया जाता है।

बताया जाता है कि फंड जुटाने के लिए ये संगठन अवैध हथियारों का व्यापार, फिरौती और अपहरण जैसी घटनाओं को अंजाम देते हैं। कुछ रिपोर्ट्स में ऐसे दावे किए जाते हैं कि ये संगठन गैर मुस्लिमों के खिलाफ जिहाद, सेना पर हमला, भारत सरकार के खिलाफ कार्य और आसाम में पूर्ण इस्लामिक शासन का प्रयास करती रह है।

भारतीय सुरक्षा बलों ने 16 दिसम्बर 2009 को इस संगठन के एक प्रमुख सदस्य कासिम अली को बाग्लादेश की सीमा से घातक हथियारों के साथ गिरफ्तार किया था, वहीं इससे पहे इसी साल 20 अप्रैल 2009 को को पुलिस ने इस समूह के 2 कुख्यात आतंकी बौल अली और यूनुस अली को भी ढेर किया है।

इन्हें भी सुनिए!

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