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नही ये जेहाद नहीं हो सकता- जाने क्या होता है जेहाद और क्या हैं इसके प्रकार

नई दिल्ली: आज कल देश और दुनिया के लिए आतंकवाद एक लाइलाज बीमारी बन गया है, जिसका इलाजा लगभग सभी देश करना चाहती है और कर भी रही है, लेकिन बावजूद इसके आतंकवाद अपना पांव पसारता ही जा रहा है। ऐसे में अगर आपने किसी आतंकी सरगना का भाषण सुना होगा तब आपको इसकी जानकारी होगी की वो लोग किस लिए निर्दोष लोगों की निर्मम हत्या कर रहे हैं।

दरअसल आतंकी सरगना का मानना है कि वह लोग जेहाद के लिए इस रास्ते को चुना है, जिसमें आतंकी किसी को भी न सिर्फ मौत की घाट उतार देते हैं, बल्कि उनकी औरतों और बच्चों को भी गुलाम बना लेते हैं, और उसके साथ निर्मम तरिके से सेक्स करने के बाद मौत की घाट उतार देते हैं। ऐसे में सबसे पहले आपको इस बात की जानकारी देते हैं कि आखिर ये जेहाद होता क्या है ?

जानकारों के अनुसार जेहाद दो तरह के होते हैं- जेहाद का अर्थ होता है मेहनत और मशक़्क़त करना, इस्लाम में दो तरह के जेहाद का जिक्र किया है, जिसमें पहला है जेहाद अल अकबर- इसे बड़ा जेहाद कहते है, और दूसरा है जेहाद अल असग़र जिसे छोटा जेहाद कहते हैं।

जेहाद अल अकबर ( बड़ा जेहाद)

जेहाद अल अकबर एक तरह से अहिंसात्मक संघर्ष है जिसमें लोग अपने सुधार की कोशिश करते है, इसके तहत अपनी इन्द्रियों पर नियंत्रण करने का प्रयास किया जाता है, जिसका मुख्य उद्देश्य है बुरी सोच या बुरी शक्तियों को मात दे कर बेहतर जीवन की कल्पना करना या फिर किसी को बेहतर जीवन प्रदान करना।

जेहाद अल असग़र (छोटा जेहाद)

जेहाद अल असग़र यानी छोटा जेहाद का मुख्य उद्देश्य है इस्लाम की हिफाज़त के लिए संघर्ष करना, इसका सीधा मतलब यह हुआ कि अगर इस्लाम धर्म को अपनाने में कोई बाध बन रहा है, या फिर मुसलमानों का शोषण के खिलाफ अपीन आवाज बुलंद करना और इसके लिए बलिदान देना।

इन दो तरह के जेहाद में कहीं भी ऐसा नहीं दिख रहा है जहां इस बात की इजाजत हो कि जेहाद में किसी महिला को बंधन बना कर सेक्स किया जाता है, या फिर उसके साथ यातनाएं की जाती है। लेकिन मौजूदा समय में इन आतंकियों ने जेहाद की अर्थ को ही बदल दिया है। आतंकियों का यह घिनौना और निर्मम खेल आखिर जेहाद कैसे हो सकता है, जिसमें आतंकी किसी दूसरे की बहू-बेटियों के साथ जबरन सेक्क करते हैं, यही नहीं आतंकी तो पशुओं के साथ भी सेक्क करते हैं। जिसका नमूना आपको इंटरनेट पर मिल सकता है।

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