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खुद अपने ही फैसले पर घिरे योगी, केंद्रीय मंत्री गहलोत ने बताया गलत

नोएडा : उत्तर प्रदेश सराकर की 17 OBC जातियों को SC में शामिल करने का फैसला सरकार के लिए गले की फांस बनती जा रही है। अपने फैसले को लेकर विपक्ष के निशाने पर चल रही योगी सरकार को अब मोदी सरकार से भी बड़ा झटका लगा है।

योगी सरकार के फैसले पर जारी सियासी संग्राम की बीच मामले की गूंज संसद में भी उठी। संसद में शून्यकाल में मुद्दा उठाते हुए बसपा सदस्य सतीश चंद्र मिश्रा ने सरकार के फैसले को असंवैधानिक करार दिया। मिश्रा ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 341 के उपवर्ग (2) के अनुसार, संसद की मंजूरी से ही अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग की सूचियों में बदलाव किया जा सकता है। यहां तक कि जातियों की सूची में बदलाव का अधिकार राष्ट्रपति के पास भी नहीं है।

मिश्रा के सवालों का जवाब देते हुए सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री थावर चंद गहलोत ने भी योगी सरकार के फैसले को गलत बताते हुए वापस लेने की वकालत की। गहलोत ने यूपी सरकार के फैसले को अनुचित करार दिया और इसे राज्य सरकार के अधिकार क्षेत्र से बाहर का मसला बताया...

दरअसल, यूपी सरकार ने 24 जून को जिला मजिस्ट्रेटों और आयुक्तों को आदेश दिया था कि वे अन्य पिछड़ा वर्ग में शामिल कश्यप, राजभर समेत 17 समुदायों को जाति प्रमाणपत्र जारी करें। लेकिन बीएसपी चाहती है कि इन 17 समुदायों को अनुसूचित जाति में शामिल किया जाए लेकिन यह निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार होना चाहिए और आनुपातिक आधार पर अनुसूचित जाति का कोटा भी बढ़ाया जाना चाहिए।

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