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क्या बीजेपी के इन सभी चुनौतियों को पार करा पाएंगे नड्डा, बने BJP के कार्यकारी अध्यक्ष

नोएडा : राहों में पड़े हैं कांटे, उसे फूल बनाना आना चाहिए, कहते हैं ये हिम्मत के सौदागर, फतह का जुनून होना चाहिए। ये पंक्तियां हैं बीजेपी के कार्यकारी अध्यक्ष जेपी नड्डा के लिए, जिन्होंने हमेशा अपने शख्सियत और सुझबुझ के जरिए अपने और अपने पार्टी के छवि को सुदृढ़ बनाया है। बता दें कि बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह द्वारा केंद्रीय गृहमंत्री का पद संभालने के बाद, बीजेपी अध्यक्ष के हर जिम्मेवारियों को संभालना उनके लिए आसान नहीं था। जिसके लिए उन्हें ऐसे चेहरे की तलाश थी जो शाह की ही तरह बीजेपी को हर बुलंदियों पर ले जा सकें। हालांकि उन्होंने अभी बीजेपी अध्यक्ष के नाम की घोषणा नहीं की है। लेकिन जेपी नड्डा को बीजेपी कार्यकारी अध्यक्ष बनाए जाने के बाद अब ये कयास भी लगाए जाने लगे है कि वे ही अब बीजेपी के अध्यक्ष भी बनाये जाएंगे।

हालांकि मामला जो भी हो, लेकिन इस कार्यकारी पद के साथ ही नड्डा के सामने जो चुनौतियां आ रहीं है वो काफी चुनौतीपूर्ण है। पहली चुनौती है अमित शाह के विशालकाय छवि को बरकरार रखना। क्योंकि शाह ने इस पद पर रहते हुए बीजेपी को जिस मुकाम पर पहुंचाया, वो काफी सरल नहीं है।

दूसरी चुनौती है, 5 राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव। बता दें कि नड्डा के कार्यकारी अध्यक्ष के कार्यकाल के अगले 6 से 7 माह में ही 5 राज्यों में चुनाव होने है, जिसमें महाराष्ट्र, हरियाणा, झारखंड, दिल्ली और जम्मू-कश्मीर है। हालांकि जम्मू-कश्मीर में तो अभी राष्ट्रपति शासन लगा हुआ है, इसलिए इस बारें में यह कहा नहीं जा सकता कि यह चुनाव कब होने है। जबकि हरियाणा में अक्टूबर, महाराष्ट्र में नवंबर, झारखंड में 5 जनवरी और दिल्ली में 20 फरवरी को चुनाव होने है।  

तीसरी चुनौती हैं दिल्ली में अपने शाख को मजबूती देना, क्योंकि पिछले बार हुए विधानसभा चुनाव में बीजेपी कुछ खास कमाल नहीं कर पाई थी और वह 70 में से 3 ही सीटों पर जीत प्राप्त कर सकी। जबकि लोकसभा चुनाव में 2019 के भांति ही 2014 में भी बीजेपी ने दिल्ली में अच्छी खासी सीटें हासिल की थी, लेकिन विधानसभा में कुछ खास नहीं कर पाई।

वहीं चौथी और पांचवी सबसे अहम चुनौती है, अपने सहयोगी दल शिवसेना और जदयू के साथ सामंजस्य बनाकर चलना। क्योंकि शिवसेना और जदयू अक्सर बीजेपी के विरूद्ध होकर उनकी ही छवि को नुकसान पहुंचाने का काम करती रहीं है। अगर हम लोकसभा चुनाव के परिणाम के हिसाब से बात करें तो शिवसेना बीजेपी के बाद सबसे बड़ी पार्टी हैं जिसने अच्छी सीटें हासिल की है। अब देखना यह है कि क्या नड्डा इन सभी जिम्मेवारियों को संभालते हुए बीजेपी को शीर्ष ऊंचाईयों तक ले जा सकते है। क्या वे दक्षिण भारत में कमल को खिला पाएंगे, जो इस बार भी नहीं खिल सका। वहीं बड़ेबोले नेताओं पर लगाम लगाना भी काफी जवाबदेही का काम है।

आपको बता दें कि जेपी नड्डा को हिमाचल प्रदेश के कद्दावर नेताओं में शुमार किया जाता है। जो ब्राह्मण परिवार से ताल्लुक रखते है। इनका जन्म 2 दिसंबर 1960 को बिहार की राजधानी पटना में हुआ। उनकी प्रारंभिक शिक्षा और बीए की पढ़ाई पटना से हुई। उन्होंने एलएलबी की डिग्री हिमाचल प्रदेश यूनिवर्सिटी से हासिल की। अगर हम इनके राजनीतिक सफर की बात करें तो इनकी राजनीतिक करियर की शुरूआत 1975 के जेपी मूवमेंट से हुई थी। 

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