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भारत के लिए इतना जरूरी क्यों है ब्रह्मपुत्र नदी पर बना बोगीबील पुल, 1965 में ही उठी थी मांग

नई दिल्ली: देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंगलवार क्रिसमस के मौके पर राष्ट्र की जनता और खास कर असम वासियों के लिए एक बड़ा तोहफा दिया है। प्रधानमंत्री ने आज असम के डिब्रूगढ़ शहर के पास बोगीबील में ब्रह्मपुत्र नदी पर बने पुल को राष्ट्र के नाम समर्पित किया है। भारत के सबसे बड़ी नदी पर बना यह डबल डेकर रेल और रोड ब्रिज भारता का सबसे लंबा पुल है जिसकी लंबाई करीब 4.94 किमी है।

यह पुल भारत के लिए हर दृष्टीकोण से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस पुल के चालु होने के बाद असम से अरुणाचल प्रदेश के बीच का सफर बेहद ही आसान और सुलभ होने के साथ-साथ चार घंटे समय की भी बचत होगी, जबकि दिल्ली से डिब्रूगढ़ के बीच ट्रेन के सफर में भी तीन घंटे की कटौती होगी।

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आपको बता दें कि अब से पहले असम-अरुणाचल के लोगों को एक दूसरे के यहां जाने के लिए मुख्यत: नदी मार्ग के रास्त नाव पर सवार होकर जाना होता है। ये रास्ता खतरे से खाली नहीं था। लेकिन अब इस पुल के चालु होने के बाद इन दोनों राज्यों के बीच यात्रा करना बेहद ही आसान हो चुका है।

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ब्रह्मपुत्र नदी के दोनों किनारे पर बसे लोगों को जोड़ने के अलावा असम के इस हिस्से को चीन की सीमा से सटे अरुणाचल प्रदेश से जोड़ना सुरक्षा के लिहाज से भी काफी अहम माना जा रहा है। इस पुल के चालु होने के बाद अब भारतीय सेना अपने भारी-भारकम साजों-सामान के चीन से सटे अरुणाचल प्रदेश के आखिरी छोर तक काफी कम समय में पहुंच सकती है।

करीब 5,900 करोड़ रुपये की (अनुमानित) लागत से बने इस “बोगीबिल पुल” के नीचे की दो रेलवे ट्रैक बिछाई गई हैं और इसके उसके ऊपर तीन लेन की सड़क बनाई गई है, जो सेना का भारी-भरकम टैंक की भार भी झेल सकता है, इस रास्ते से टैंक आसानी से गुजर सकता है। देशवासियों के लिए यह नजारा बेहद ही खास होगा जब ने इस पुल पर एक साथ ट्रेन और बस-ट्रक को गुजरते देखेंगे।

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गौरतलब हो कि इससे पहले धेमाजी से डिब्रूगढ़ के बीच 500 किमी की दूरी तय करने के लिए 34 घंटे का समय लगता है, लेकिन अब इस पुल के बाद ये दूरी महज 100 किमी को होगी और इस सफर को पूरा करने में महज 3 घंटे का समय लगेगा। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि ब्रह्मपुत्र नदी पर इस पुल का निर्माण कराये जाने की मांग सबसे पहले साल 1965 में उठी है। इससे पहले साल 1962 में भारत-चीन जंग के दौरन इस पुल की कमी खली थी।

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