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आखिर कौन है सूरत अग्निकांड का जिम्मेवार ?

सूरत के सरथाना में हुए तक्षशिला बिंल्डिंग अग्निकांड से अब तक हर कोई मुखातिब हो चुका होगा। ये वही अग्निकांड है जिसमें कई परिवारों ने अपने चिरागों खो दिया है। 21 बच्चों की जान लेनेवाला ये अग्निकांड जिसने देखा, उसके रोंगटे खड़े हो गए। इस अग्निकांड को देखकर जो सवाल मन में कौंधता है वह यह कि आखिर कौन है इस हमले का जिम्मेवार आप, हम या प्रशासन? ये किसकी गलती थी, जिसे 21 बच्चों ने अपनी जान देकर भरा, कौन है इस पूरे मामले का जिम्मेवार ...

गुजरात के सूरत में घटी इस घटना के बाद गुजरात में त्राहि त्राहि मच गई है। ये हादसा बिल्डिंग के उस फ्लोर पर हुआ, जो गैरकानूनी तरीके से बनाया गया था। लेकिन इंस्टीट्यूट में लगी इस आग ने सबको सवालों के कटघरे में खड़ा कर दिया। अगर ये फ्लोर गैरकानूनी तरीके से बनाया गया था तो प्रशासन ने इसके खिलाफ कार्यवाई क्यों नहीं की? क्यूं प्रशासन मूक दर्शक बना रहा? क्या प्रशासन हादसे का इतंजार कर रहा था?

बता दें कि सूरत ही नहीं ज्यादातर राजधानी के कोचिंग संस्थानों का ऐसा ही बुरा हाल है। लोग कोचिंग खोलने के लिए कॉमर्शियल काम्पलेक्स को चुनते है, लेकिन वे वहां उपलब्ध साधनों पर ध्यान नहीं देते। कम से कम लागत में अधिकतम आय के चक्कर में बिल्डर बिल्डिंग में कमजोर या अधिकतर ऐसे साधनों का इस्तेमाल करते है जो सस्ते होते है। इसके साथ ही वे विभिन्न सुरक्षा संयंत्र को ताक पर रख देते है।

अगर हम हजरतगंज की बात करें तो हजरतगंज के कोचिंग संस्थानों का भी वहीं हाल है जो सूरत अग्निकांड के भेट में चढ़ा तक्षशीला कोचिंग संस्थान का था। सारे मानको को किनारा कर कोचिंग संस्थान चलाए जा रहे है, बिल्डिंग में न कोई अग्निशमन यंत्र व्यवस्था और नहीं पर्याप्त साधन। ये सैकड़ों कोचिंग संस्थान मौत को दावत दे रहे है। ऐसा ही कुछ हाल वाराणसी के कई मेडिकल कोचिंग का भी है। यहां भी पैसों की लालच में बच्चों को कोचिंग संस्थानों में भूसे की तरह भरा जाता है। जहां 50 छात्रों की जगह वाले कमरे में 300 छात्रों को बैठाया जाता है। और प्रशासन भी उगाही कर इन सभी मुद्दो पर चुप रहता है। ना तो शिक्षा विभाग कोचिंग संस्थानों की जांच करता है और ना ही कोई एक्शन लेता है, जिससे ऐसे संस्थानों की तादाद भी दिन ब दिन बढ़ता जा रहा है। यहां तक की अग्निशमन विभाग भी कई मामलों में फेल हो रहा है ना तो विभाग के पास घटना के वक्त जरूरी सामान होता है और ना ही पूरी तैयारी, जिसका नुकसान मुसीबत में फंसे लोगों को उठाना पड़ता है।

आपको बता दें कि सूरत के सरथाना में 21 छात्रों की जान लेने वाला अग्निकांड तक्षशिला आर्केड बिल्डिंग के उस फ्लोर पर हुआ, जो गैरकानूनी तरीके से बनाया गया था। इस फ्लोर की छत को फाइबर से बनाया गया था, वहीं थर्ड फ्लोर से फोर्थ फ्लोर की सीढ़ी लकड़ियों की थी। जो इस आग को और फैलाने का काम कर रहे थे। बिल्डिंग में लगे इन सामानों की वज़ह से आग पर काबू पाना मुश्किल था लेकिन मौके पर पहुंची 19 दमकल गाड़ियां भी भगवान भरोसे थी। क्योंकि इनके पास भी पर्याप्त साधन नहीं था।

इस मामले में सरथाना पुलिस स्टेशन में 304-बी के तहत तीन लोगों पर एफआईआर दर्ज कर लिया गया है। जिसमें से दो को गिरफ्तार भी कर लिया गया है। हालांकि मामले की जांच सूरत क्राइम ब्रांच के एसीपी को सौंपी गई है। अब कुछ प्रश्न आपके लिए क्या क्राइम ब्रांच को इस केस का जिम्मा देने से ऐसे हादसों पर लगाम लग सकेगा या एकबार फिर सरकार इस अग्नीकांड का जिम्मा क्राइम ब्रांच को देकर अपना पल्ला झाड़ने की कोशिश कर रहा है? क्या यह सिलसिला यूं ही लगातार जारी रहेगा और कितने जान ऐसे अग्निकांड के भेट चढ़ेंगे? क्या इसका जवाब आप दे सकते हैं...

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