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आने जाने के लिए लिफ्ट मांगने वाले सांसद बने लोकसभा के प्रोटेम स्पिकर

नई दिल्ली: एक ओर मोदी की नई सरकार में प्रायाप्त पद नहीं मिलने से नाराजा JDU का गुस्सा अभी नरम भी नहीं पड़ा है, वहीं दूसरी तरफ 17वीं लोकसभा के लिए प्रोटेम स्पीकर की घोषणा के बाद NDA  का एक और मुख्य सहयोगी शिवसेना बगावती तेवर अख्तियार कर सकती है। आखिर ऐसा क्यों कर रहे हैं? इसे विस्तार से समझिए...

आम चुनाव में मिली प्रचंड बहुमत के साथ सत्ता में आई BJP की नेतृत्व वाली NDA सरकार सहयोगियों की मांग दरकिनार कर बेखौफ फैसले ले रही है। इसी कड़ी में लोकसभा चुनाव में अकेले दम पर 303 सीटें जीतने वाली बीजेपी ने एक और ऐसा फैसला लिया है, जिसका संगठन पर घतक असर हो सकता है।

दरअसल, NDA के सबसे प्रमुख सहयोगियों में से एक शिवसेना पिछले काफी दिनों से प्रोटेम स्पीकर पर अपना अधिकार बता रही थी, लेकिन जब घोषणा हुई तो शिवसैनिकों के अरमां आंसुओं में बह गए। टीकमगढ़ से बीजेपी सांसद डॉ. वीरेंद्र कुमार को 17वीं लोकसभा के लिए प्रोटेम स्पीकर बना दिया गया।

दलित समुदाय से जुड़े वीरेंद्र कुमार खटीक मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ से सांसद चुने गए हैं। सागर जिले के रहने वाले खटीक कुल सात बार संसद में अपने क्षेत्र का पतिनिधित्व कर चुके हैं। वह चार बार अपने घरेलू क्षेत्र सागर लोकसभा सीट से चुनाव जीतकर संसद पहुंचे जबकि उन्होंने तीन बार संसद में टीकमगढ़ का प्रतिनिधित्व किया है।

मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में अल्पसंख्यक मंत्रालय व महिला एवं बाल विकास मिनिस्ट्री में राज्यमंत्री रहे वीरेंद्र कुमार बचपन से ही आरएसएस से जुड़े रहे हैं। अपने क्षेत्र में अपनी सादगी के लिए मशहूर खटीक कई बार आने जाने के लिए सड़क किनारे खड़े होकर लिफ्ट मांगते भी दिख चुके हैं।

कौन होता है प्रोटेम स्पीकर

आपको बता दें कि प्रोटेम स्पीकर का चुनाव लोकसभा के नियमित स्पीकर के चुनाव से पहले के कामकाज के लिए किया जाता है। जो मुख्य तौर पर सदन के सबसे वरिष्ठ सदस्य होते हैं। प्रोटेम स्पीकर ही संदन में नए चुनकर आए सदस्यों को शपथ दिलाते हैं। हालांकि इनका काम लोकसभा स्पीकर के चुनाव के बाद ही समाप्त हो जाता है।

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