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विधायक जी की बेटी के बाद सामने आए दो और लव बर्ड!

नोएडा: क्या सचमुच किसी लड़की की आजादी की चाहत उन बंदिशों से होकर गुजरती है, जिसमें उसकी जाति उसके अस्तित्व को निगल जाती है। आखिर किसने उठाई है ये दिवार, जहां अपने महबूब का प्यार पाने के लिए एक बेटी को अपने पिता का प्यार कुर्बान करना पड़ता है। एक लड़की जमाने से लड़ते हुए अपना घर-बार छोड़ने को मजबूर हो जाती है। एक पिता धर्म बदलने की चेतावनी देता है। ऐसी चर्चा इसलिए क्योंकि इन दिनों मीडिया से लेकर सोशल मीडिया तक प्यार और नफरत के किस्से ही पनप रहे हैं।

हाल ही में उत्तर प्रदेश के बरेली में बीजेपी विधायक की बेटी ने अपने पिता और परिवार का प्यार अपने महबूब के लिए कुर्बान कर दिया। अपने प्यार की खातिर बेटी ने अपने पिता की इज्जत नीलाम कर दी। लेकन एक बाप-बेटी की रूसवाई की चर्चा अभी थमी भी नहीं थी कि अमरोहा की अनामिका ने समाज और जाति के बंधनों को तोड़कर दूसरी जाति के शख्स से शादी कर ली है

लेकिन अब अनामिका के साथ भी वैसा ही हो रहा है जैसा बरेली की साक्षी के साथ हुआ। उसके घरवालों ने बेटी की शादी नामंजूर कर दी, बेटी कहती है उसकी जान खतरे में है। साक्षी की तरह अनामिका ने भी सोशल मीडिया पर वीडियो डालकर सुरक्षा की मांग की है, प्रेमी के प्यार में पागल लड़की अपने ही परिवार की दुश्मन बन गई। कहती है अगर उसके पति या ससुराल वालों को कुछ हुआ तो इसके जिम्मेदार उसके पिता होंगे।

हां यह सच है कि अनामिका की कहानी काफी हद तक साक्षी से मिलती है लेकिन पूरी तरह नहीं, अनामिका की कहानी साक्षी की तरह सीधी-सपाट नहीं है। इस कहानी में कई पेंच हैं। दरअसल, अनामिका के पिता ने अमरोहा पुलिस के सामने अपनी बेटी का अपहरण करने और टार्चर कर वीडियो जारी करवाने का आरोप लगाया है। लड़की के पिता ने कहा है कि अगर पुलिस ने उनकी बेटी को नहीं तलाश किया तो वह धर्म परिवर्तन करा लेगें। 

साक्षी और अनामिका के मामले से आगे बढ़ते हैं तो भोपाल में महरूम प्यार की रुसवाई छाई है। यहां इलाहाबाद से आई एक युवती का भोपाल में लव मैरिज करना परिजनों को नागवार गुजरा। उप्र पुलिस के साथ आए परिजनों ने शनिवार को युवक के घर जमकर हंगामा किया। जिसके कारण मां की तबीयत बिगड़ गई। परिजन अड़े हैं कि उन्हें बेटी से मिलने दिया जाए, लेकिन युवक के पिता की मजबूरी यह है कि बेटा और बहू कहां हैं, उन्हें भी पता नहीं। वहीं आरोप लग रहे हैं कि राजनीतिक दबाव के कारण पुलिस मूकदर्शक बनी है।

इस रिपोर्ट के माध्यम से न तो हम किसी का समर्थन कर रहे हैं और न ही किसी का विरोध करते हैं। बल्कि इस तरह के नीजी मामलों में हमने बोलने के अधिकारी भी नहीं है, लेकिन जब घर का मसला पब्लिक में आए तो न चाहते हुए भी बोलना पड़ता है।

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