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पहली बार जम्मू-कश्मीर में भी लहराएगा तीरंगा, शाह करेंगे ध्वजारोहण !

नोएडा : सात दशक से जकड़े धारा 370 वाली जंजीर से भारत के जन्नत कश्मीर को मिली आजादी की चर्चा अभी थमी भी नहीं थी कि मोदी सरकार जम्मू-कश्मीर को लेकर एक और ऐतिहासिक कदम उठाने की तैयरी में है, लेकिन दुर्भाग्य से सरकार के कदम खींचने वालों ने भी अपनी कवायत तेज कर दी है।

दरअसल, खबर है कि धारा 370 पर जलने-जलाने की धमकियों को कोयले की भट्टी में झोंकने वाले गृह मंत्री अमित शाह 15 अगस्त पर कश्मीर की सैर पर रहेंगे। सूत्रों के अनुसार 73वां स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या यानी 14 अगस्त की शाम को शाह श्रीनगर के लिए रवाना होने की योजना बना रहे हैं।

कहा जा रहा हैं कि अपने दौरे के क्रम में शाह धारा 370 के खात्मे के बाद जम्मृ-कश्मीर के ताजा हालातों का जायजा लेने के साथ ही 15 अगस्त के मौके पर श्रीनगर के लाल चौक पर तिरंगा फहराएंगे। अगर वाकई अमित शाह ऐसा करते हैं तो यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में एनडीए सरकार का दूसरा ऐतिहासिक कदम होगा।

साथ ही आपको बता दें कि इससे पहले पाकिस्तानी आतंकी संगठनों से धमकियां मिलने के बावजूद 26 जनवरी 1992 को तत्कालीन बीजेपी अध्यक्ष मुरली मनोहर जोशी और तब के आरएसएस प्रचारक नरेंद्र मोदी ने श्रीनगर के लाल चौक पर तिरंगा फहराने में सफलता हासिल की थी। जिसके बाद यह दूसरा मौका होगा।

बताया जा रहा है कि केंद्र 15 अगस्त के कार्यक्रम की तैयारियों को लेकर आंतरिक चर्चा कर रहा है। जबकि भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोवाल पहले से जम्मू-कश्मीर में डेरा जमाए हैं। जहां वह राज्य के अलग-अलग हिस्सों का दौरा कर आतंकित लोगों में सुरक्षा काल भाव पैदा कर रहे हैं। लेकिन धारा 370 की तरह सरकार के इस फैसले पर भी सियासतनों  बंटते दिख रहे हैं।

ऐसे में सबसे दिलचस्प तो बिहार के सुशासन बाबू का फैसला है, जो धारा 370 पर सरकार का समर्थन नहीं करते लेकिन लाला चौक पर तिरंगे की वकालत में नीतीश कुमार का भी समर्थन प्राप्त है। जबकि फैसले के विरोध में उतरे एनसीपी नेता मजीद मेमन ने कश्मीरियों पर जबरन फैसला थोपने का आरोप लगाया है। मेमन सरकार से जानना चाहते हैं कि कि आखिर शाह किसी जल्दबाजी में हैं, जो दनादना फैसले किए जा रहे हैं।

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