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... तीन-तीन बच्चे कर रहें मौत का इंतजार, और नेता हैं कि ...

नोएडा : जिस वक्त पवित्र संसद में मौजूद सांसद निष्ठा की कसम खा रहे थे, उस वक्त भी बिहार में नौनिहालों को चमकी बुखार निगल रहा था। लेकिन इस अज्ञात बुखार के मकड़जाल में फंसे मासूमों की रक्षा करने के बजाय सांसद संसद को धर्म संसद बनाने पर तुले थें। आपको बता दें कि बिहार में बीते कई दिनों से चमकी बुखार मौत का तांडव कर रहा, घंटे-दर घंटे मासूमों की मौत का आकड़ा 140 पार कर चुका है। लेकिन इनकी परवाह किसे हैं, बिहार सरकार के इस रवैये पर शर्म नहीं तो क्या आनी चाहिए, जो मासूमों की मौत का तमाशा देख रहे हैं और सरकारी नुमाइंदे पत्रकारों के सवाल से ऐसे बचते हैं जैसे पैरों के नीचे अंगारे धधक रहे हों।

मासूमों का कब्रगाह बने मुजफरपुर अस्पताल में एक बिस्तर पर तीन-तीन बच्चे मौत का इंतजार करे रहें है, अस्पताल में बीमार बच्चों के लिए दवाओं का डोज कम पड़ गया। मरीजों के सामने गंदगी का अंबार लगा है। बिजली से चलने वाले ICU में बिजली तक नहीं है और सीएम, डिप्टी सीएम जवाब देने को तैयार नहीं।

सीएम नीतीश कुमार को मरते बच्चों से अधिक दिल्ली में बैठक और शिष्टाचार जरूरी है, डिप्टी सीएम के लिए बैंकिंग पर बैठक जरूरी है लेकिन मासूमों की मौत पर ऐसे मुंह मोड़ लेते हैं जैसे इनका कोई वास्ता ही नहीं।

शर्म आती है ऐसी व्यवस्था और उनके ऱखवालों पर जो हालात से निपटने के लिए बैठक करते हैं और मासूमों की चिखों की बीच विश्व कप पर चर्चा में जुट जाते हैं। चिखते-चिल्लाते लोगों के बीच प्रेस कॉनफ्रेंस में सो जाते हैं और पूछने पर चिंतन की बात करते है।

शर्मा तो करिश्माई प्रधानमंत्री और आधुनिक सियासत के चाणक्य कहे जाने वाले गृह मंत्री अमित शाह को भी आनी चाहिए, जो हर छोटी बड़ी घटनाओं पर ट्वीट करते हैं। सासंदों को फाइव स्टार होटल में डीनर पर बुलाते हैं लेकिन मासूमों की मौत के डेढ़ शतक के बाद भी चुप्पी साधे बैठे हैं।

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