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तो अब भारत में नहीं चलेगा तलाक..तलाक..तलाक...

नोएडा : सालों से जारी जद्दोजहद के बाद आखिरकार मोदी सरकार ने इस्लाम के इस क्रूर रवायत से मुस्लिम महिलाओं को मुक्ति दिला ही दी। हालांकि लोकसभा से पास हो चुका बिल राज्यसभा में एक बार फिर से अटकले के कगार पर था, लेकिन सरकार ने विरोधियों को अपनी बातों से सहमत कराने में सफलता हासिल की और अब भारत भी उन देशों में शुमार हो चुका है, जहां तीन तलाक जैसे जघन्य रवायत का कोई स्थान नहीं।

लोकसभा से पास होने के बाद मंगलवार को तीन तलाक बिल राज्यसभा में पेश किया गया था। जिसपर चर्चा के लिए चार घंटे का समय तय किया गया था। बिल को लेकर बीजेपी ने अपने सांसदों को व्हिप जारी किया था, जिससे की सदन में सरकार की मजबूत दिख सकें। जबकि इधर जदयू और एआईएडीएमके के वॉकआउट के बाद सरकार की राह और भी आसान हो गई थी।

दरअसल, जदयू और एआईएडीएमके इस बिल के खिलाफ थे, लेकिन सदन से वॉकआउट के बाद राज्यसभा में सदस्यों की संख्या 213 रह गई। ऐसे में बहुमत के लिए 109 वोटों की दरकार थी और बिल पर चर्चा के दौरान समर्थन में 99 वोट पड़े जबकि खिलाफ में 84 वोट पड़े, और इस तरह से मोदी सरकार और भारत के लिए ऐतिहासिक तीन तलाक बिल संसद से पास हुआ।

इससे पहले में संसद में चर्चा के दौरान सदस्यों की बात सुनाए तीन तलाक से जुड़ी कुछ मुख्य बातों पर गौर करें...

ट्रिपल तलाक बिल पर दिग्विजय सिंह का संशोधन प्रस्ताव गिरा दिया गया।

ट्रिपल तलाक बिल को सिलेक्ट कमिटी के पास भेजना का प्रस्ताव भी राज्यसभा में गिरा दिया गया।

ट्रिपल तलाक बिल पर चर्चा के दौरान राज्यसभा में पर्ची के जरिए वोटिंग हुई।

वोटों की गिनती के क्रम में समर्थन में 99 वोट पड़े जबकि खिलाफ में 84 वोट

इससे पहले संसद में चर्चा के दौरान बिल का समर्थन करते हुए कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि मुस्लिम महिलाओं के हितों की रक्षा के लिए तीन तलाक बिल जरूर है। वहीं चर्चा में शामिल हुए अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री मुक्तार अब्बास नकवी ने तीन तलाक को क्रूर कूप्रथा बताते हुए इस खत्म किए जाने की मांग एक और बार

इसके अलावा बीजेपी महिला ब्रीगेड की सरोज पांडे ने साफ शब्दों में कहा कि तीन तलाक बिल एक विशेष समुदाय की महिलाओं की सुरक्षा के लिए बनाया गया है।

जबकि इस बिल का कांग्रेस पार्टी  ने विरोध किया है, राज्यसभा में पार्टी का पक्ष रखते हुए वरिष्ठ सदस्य गुलाम नवी आजाद ने इसे पति-पत्नी के रिश्ते में दरार लाने वाला बिल करार दिया।

आपको बता दें कि केंद्र की सत्ताधारी बीजेपी ने चुनावी चर्चाओं के दौरान मुस्लिम महिलाओं को इस भीषण कुप्रथा से आजादी का वादा किया था। जिसपर अमल करते हुए मोदी सरकार ने पहले भी संसद में तीन तलाक बिल पेश किया था, लेकिन तब लोकसभा से पास होने के बाद बिल राज्यसभा में अटक गया था, जिसके बाद सरकार दो बार अध्यादेश भी ला चुकी है। और तीसरी बार भी ऐसी ही स्थिति दिख रहीं थी, लेकिन सरकार के साकारात्मक रूख से सामने विपक्ष को झूकना पड़ा।

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