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मोदी के इस भाषण ने विपक्षियों के कर दिये मुंह बंद, कहा हम लकीर खिंचने के लिए छोटी नहीं करते

नोएडा : 17 वीं लोकसभा के कार्यवाही के शुरूआत के साथ ही विभिन्न मुद्दों पर विपक्षियों और सत्तापक्षों के दलों के बीच गहमागहमी चल रहा है। इतने गहमागहमियों के बीच आज यानी 25 जून को पीएम मोदी को उन सभी सवालों का जवाब देना था, जो सवाल विपक्षियों द्वारा उठाया गया था। लेकिन मोदी भी कहा बख्शने वाले उन्होंने विपक्षियों को जमकर लताड़ा। पीएम मोदी ने कहा कि, ‘आपकी ऊंचाई आपको मुबारक हो। आप इतने ऊंचे चले गए हैं कि जमीन दिखना बंद हो गया है। आप इतने ऊंचे चले गए हैं कि आप जड़ों से उखड़ गए हैं। आप इतने ऊंचे चले गए हैं कि आपको जमीन के लोग तुच्छ लगने लगे हैं। आपका और भी ऊंचा होना मेरे लिए संतोष और आनंद की बात है।

उन्होंने कहा कि, ‘मैं चुनौती देता हूं कि 2004 से 2014 तक शासन में बैठे हुए लोगों ने कभी अटल जी की सरकार की तारीफ की हो। उनकी छोड़ों नरसिम्हा राव जी की सरकार की तारीफ की हो। इस सदन में बैठे हुए इन लोगों ने तो एक बार भी मनमोहन सिंह जी की सरकार का जिक्र तक नहीं किया, अगर किया हो तो बताएं।‘

पीएम मोदी ने कहा, ‘हम दूसरे की लकीर छोटी करने में विश्वास नहीं करते, हम अपनी लकीर लंबी करने के लिए जिंदगी खपा देते हैं। आज मैं संतोष के साथ कह सकता हूं कि कठिनाईयों के बावजूद हमने सही दिशा को छोड़ा नहीं। हमने देश आजाद होने के बाद जाने-अनजाने में एक ऐसा कल्चर स्वीकार कर लिया था, जिसमें देश के सामान्य मानवी को हक के लिए जूझना पड़ता है।‘

जिसके बाद पीएम मोदी ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि, ‘मैं संतोष के साथ कह सकता हूं कि 70 साल से चली आ रही बीमारियों को दूर करने के लिए हमने सही दिशा पकड़ी और काफी कठिनाइयों के बाद भी उसी दिशा में चलते रहे। हम उस मकसद पर चलते रहे और ये देश दूध का दूध पानी का पानी कर सकता है ये सबने देखा।‘

मोदी ने कहा, ‘ये कोई जीत या हार का प्रश्न नहीं है। ये जीवन की उस आस्था का विषय है, जहां कमिटमेंट क्या होता, डेडिकेशन क्या है, जनता के लिए जीना-जूझना-खपना क्या होता है। और जब पांच साल की अविरत तपस्या का संतोष मिलता है तो वो एक अध्यात्म की अनुभूति करता है।‘

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