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पुलवामा हमले में शहीद जवान का घोर अपमान

आगरा: पुलवामा के आतंकी हमले में शहीद हुए ताज नगरी आगरा के सपूत कौशल किशोर रावत की शहादत पर आज उनका परिवार ही नहीं बल्कि पूरा इलाका गर्व करता है। जहां उनकी शहादत की चर्चा होती है तो परिवार और इलाके के लोगों के चेहरों पर अपने वीर सपूत की शहादत का दर्द होता है । वही शहादत को लगभग 6 माह बीत जाने के बाद भी शहीद स्मारक के निर्माण ना होने और शहीद के नाम पर सड़क का नामकरण ना किए जाने को लेकर शहीद के परिवार जन व्यथित है । और जल्द शहीद स्मारक का  निर्माण ना होने की दशा में अनशन पर बैठने का ऐलान कर रहे हैं।

दरअसल , मोहब्बत के त्योहार (वैलेनटाइन डे) पर उल्लास में डूबी सुलहकुल नगरी शाम होते-होते श्रीनगर से आए एक संदेश से सिहर गई। 14 फरवरी 2019 को जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में सीआरपीएफ के काफिले पर हमले में आगरा का जवान कौशल कुमार रावत भी शहीद हो गये।  सीआरपीएफ काफिले पर हमले की खबर आते ही बेचैनी पैदा हो गई। शहीद के पिता गीता राम रावत ने तत्काल गुड़गांव में कौशल के पुत्र विकास को फोन कर खैरियत पूछी तो फोन खटकने शुरू हुए। करीब चार घंटे की बेचैनी के बाद कइरई में कौशल की शहादत की खबर आई तो गांव रो उठा। मां धन्नो देवी, भाई कमल किशोर और पूरे परिवार का रुदन फूट पड़ा।

शहीद के घर नेताओ अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों सहित शहर की तमाम जनता पहुंच गयी। सीआरपीएफ जवान कौशल कुमार रावत की शहादत के बाद सरकार ने ₹2500000 की आर्थिक सहायता तो की लेकिन ना तो शहीद स्मारक बना और ना ही वादे के मुताबिक सड़क का का नाम शहीद के नाम पर रखे जाने की कवायद शुरू हुई इसको लेकर शहीद के परिजन आहत है ।  शहीद कौशल कुमार की माता धनो देवी ने बताया कि अगर जल्द शहीद स्मारक का काम शुरू नहीं हुआ तो सड़कों पर अनशन करने के लिए बैठने को मजबूर होंगी उनका कहना है कि उन के वीर सपूत ने इस देश के लिए अपने प्राणों की आहुति दे दी और अब अधिकारी उनके बेटे की शहादत का सम्मान तक नहीं कर पा रहे ।

वहीं, शहीद के भाई कमल किशोर ने बताया की शहादत के बाद कई दिनों तक अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों का आना जाना लगा रहा तमाम वादे किए गए । लेकिन, कहीं कोई सुनवाई नहीं है ना अधिकारी सुनते हैं और ना जनप्रतिनिधि।

शहीद कौशल किशोर रावत को बड़े पापा कहने वाली उनकी भतीजी ने बताया की अधिकारियों को लगातार अवगत कराने के बावजूद शहीद स्मारक का काम अभी तक शुरू नहीं हुआ है लगभग छह माह शहादत को बीत चुके हैं ।  लेकिन प्रशासन इस और ध्यान नहीं दे रहा है ।

जहां, एक और पूरा देश शहादत के समय शहीदों पर गर्व करते हुए फूला नहीं समाता। वही शहादत के कुछ दिनों  बाद शहीद के परिवार जनों की क्या हालात है।  इनको जानने की कोशिश ना तो जनप्रतिनिधि करते हैं । नेता करते हैं और ना ही अधिकारी उनकी कोई सुध लेते हुए नजर आते हैं।

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