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राष्ट्रपति के अभिभाषण की वो मुख्य बातें, जो शायद आपने न सुनी हो

नोएडा : आम चुनाव में मिली प्रचंड जीत के बाद गुरुवार को संसद के संयुक्त सत्र को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने मोदी सरकार 2.0 के एजेंडे को देश के सामने रखा। उन्होंने बताया कि सरकार किस तरह न्यू इंडिया की नींव रख रही है, राष्ट्रपित ने अपने संबोधन में सभी सांसदों और खास कर नये सांसदों और महिला सांसदों को शुभकामनाएं दी। यहां आपको राष्ट्रपति के संबोधन की कुछ बड़ी बातें बता रहे हैं...

राष्ट्रपित ने अपने संबोधन में कहा...

नए भारत की यह परिकल्पना केरल के महान कवि श्री नारायण गुरु के इन सद्विचारों से प्रेरित है: “जाति-भेदम मत-द्वेषम एदुम इल्लादे सर्वरुम, सोदरत्वेन वाड़ुन्न मात्रुकास्थान मानित”।

नया भारत, गुरुदेव रवीन्द्र नाथ टैगोर के आदर्श भारत के उस स्वरूप की ओर आगे बढ़ेगा जहां लोगों का चित्त भय-मुक्त हो, और आत्म-सम्मान से उनका मस्तक ऊंचा रहे। गुरुदेव के शब्दों में: “चित्तो जेथा भय-शून्नो, उच्चो जेथा शिर।”

मेरी सरकार बिना भेदभाव के विकास कार्यों को आगे बढ़ा रही है। देशवासियों को लंबे समय तक मूलभूत सुविधाओं के लिए इंतजार था, लेकिन अब स्थिति बदली है....

2014 से पहले देश में निराशा का माहौल था लेकिन अब हमारी सरकार राष्ट्रनिर्माण की दिशा में सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास की नीति के साथ आगे बढ़ रही है।

मेरी सरकार 30 मई को शपथ लेने के तुरंत बाद नए भारत के निर्माण में जुट गई। नये भारत में युवाओं के सपने पूरे होंगे, उद्योग को ऊंचाईयां मिलेंगी, 21वीं सदी के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया जाएगा। 21 दिन के कार्यकाल में ही मेरी सरकार ने किसानों, जवान के लिए बड़े फैसले किए हैं।

उन्होंने कहा, ‘किसान हमारे देश का अन्नदाता है। प्रधानमंत्री किसान योजना के तहत अब देश के हर किसान को मदद दी जाएगी। साथ ही किसानों के लिए पेंशन योजना भी लागू की जा रही है। पहली बार किसी सरकार ने छोटे दुकानदारों के लिए पेंशन की योजना शुरू की है, जिसका लाभ 3 करोड़ दुकानदारों को मिलेगा।

देश की सुरक्षा में जुटे जवानों के लिए भी मेरी सरकार लगातार फैसले कर रही है। मेरी सरकार ने जवानों के बच्चों को मिलने वाली स्कॉलरशिप बढ़ाई। पहली बार राज्य पुलिस के जवानों के बच्चों को भी इस योजना में शामिल किया गया है।

जल संकट को देखते हुए सरकार ने पहली बार जल शक्ति मंत्रालय का निर्माण किया है, जबकि क्लाइमेट चेंज, ग्लोबल वार्मिंग को देखते हुए देश में स्वच्छ भारत की तरह ही जल संरक्षण के लिए आंदोलन चलाया जाएगा।

मेरी सरकार का लक्ष्य है कि 2022 तक सभी किसानों की आय दोगुनी की जाए। इसके लिए हम दशकों से रूकी हुई सिचाईं योजना को पूरा कर रहे हैं। मतस्य पालन को बढ़ा रहे हैं, किसानों को आधुनिक खेती की शिक्षा दे रहे है। हम ब्लू क्रांति लाने को प्रतिबद्ध हैं।

हमने ग्रामीण भारत को मजबूत बनाने के लिए बड़े पैमाने पर निवेश किया है। कृषि क्षेत्र की उत्पादकता को बढ़ाने के लिए आने वाले सालों में 25 लाख करोड़ रुपये के निवेश की योजना है। उन्होंने कहा अभी तक किसानों के पास मदद के तौर पर 12 हजार करोड़ रुपये की राशि पहुंचाई जा चुकी है।

देशवासियों की मूलभूत आवश्यकताएं पूरी करते हुए, अब सरकार उनकी आकांक्षाओं के अनुरूप एक सशक्त, सुरक्षित, समृद्ध और सर्वसमावेशी भारत के निर्माण की दिशा में आगे बढ़ रही है। यह यात्रा ‘सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास’ की मूल भावना से प्रेरित है।

वहीं राष्ट्रपति ने देश की स्वास्थय सेवाओं पर जोर देते हुए कहा कि इलाज के खर्च से गरीब परिवार आर्थिक संकट में फंस जाते हैं। उन्हें इस संकट से बचाने के लिए, 50 करोड़ गरीबों को 'स्वास्थ्य सुरक्षा कवच' प्रदान करने वाली विश्व की सबसे बड़ी हेल्थ केयर स्कीम 'आयुषमान भारत योजना' लागू की गई है।

उन्होंने कहा कि मेरी सरकार बैंक सेवाओं को देशवासियों के द्वार तक पहुंचाने का काम भी कर रही है।

समाज में महिला के खिलाफ बढ़ती अपराध को ध्यान में रखते हुए कोविंद ने कहा कि महिला सशक्तीकरण, मेरी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में से एक है। नारी का सबल होना तथा समाज और अर्थ-व्यवस्था में उनकी प्रभावी भागीदारी, एक विकसित समाज की कसौटी होती है। सरकार की यह सोच है कि न केवल महिलाओं का विकास हो, बल्कि महिलाओं के नेतृत्व में विकास हो।

उन्होंने कहा कि महिलाओं के विरुद्ध अपराधों के दंड अधिक सख्त बनाए गए हैं और नए दंड प्रावधानों को सख्ती से लागू किया जा रहा है। इसके साथ ही राष्ट्रपति ने मुस्लिम महिलाओं को तीन तलाक जैसी जघन्य प्रथा से आजादी दिलाने की दिशा में भी सरकार के फैसलों का जिक्र किया।

इसमें कोई संदेह नहीं की राष्ट्रपति का अभिभाषण राष्ट्रहित में रहा लेकिन देखने वाली बात ये होगी कि राष्ट्रपति के इन बातों पर केंद्र की मौजूदा मोदी सरकार 2.0 कितना अमल कर पाती है। अगर वाकई सराकर राष्ट्रपति के इन शब्दों पर सत्यता के साथ अमल करती हैं तो वो दिन दूर नहीं जब दुनिया भर में भारत की छवि विकासशील नहीं बल्कि विकसित राष्ट्र की होगी।

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