Breaking News
  • केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने नई metrorailpolicy को मंजूरी दी
  • मध्यप्रदेश: स्थानीय निकाय चुनाव में BJP की जीत
  • केरल के कथित धर्मांतरण मामले की जांच NIA के हवाले: सुप्रीम कोर्ट
  • दिल्ली, यूपी समेत कई राज्यों में फैला स्वाइन फ्लू- अबतक 600 लोगों की मौत
  • सिंचाई परियोजनाओं के लिए 9,020 करोड़ रुपए की अतिरिक्त राशि मंजूर
  • अमेरिका ने हिजबुल मुजाहिदीन को विदेशी आतंकी संगठन घोषित किया

मोदी-शाह नामक अश्वमेध को पकड़ने के लिए सड़क पर खड़े हैं यदुवंशी लव-कुश!

पटना: बीजेपी अध्यक्ष के तौर पर अमित शाह ने अपने तीन सालों का कार्यकाल पूरा कर लिया है। अमित शाह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के काफी कारीबी माने जाते हैं, 2014 के मई महीने महीने में नरेंद्र मोदी ऐतिहासिक समर्थन के साथ प्रधानमंत्री पद की शपथ ली और इसी साल जुलाई महीने में भाजपा की कमान अमित शाह को सौंप दी गई।

इस बाद तीन सालों में मोदी और अमित शाह ने विपक्ष की राजनीति से बोर हो चुकी बीजेपी को नए आयाम तक पहुंचाने में सफलता हाशिल की, मोदी और अमित शाह के कसरत का ही नतीजा है कि बीजेपी आज देश की नहीं दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी है, जबकि देश के 18 ऐसा राज्य है जहां बीजेपी या उसकी सहोयगियों की सरकारे सत्ता में हैं।

मोदी चेहरे और अमित शाह की रणतीतियों के कारण बीजेपी ने इस दौरान हुए राज्यों के हर छोटे बड़े चुनाव में अपनी सफलता के पर्चम लहाराए। जिसका दो सबसे बड़ा नमूना है उत्तर प्रदेश और बिहार। यूपी में काफी दिनों तक सत्ता से बाहर रही बीजेपी ने मोदी और शाह के नेतृत्व में 2017 विधानसभा चुनाव के दौरान सत्ताधारी समाजवादी पार्टी के साथ तमाम विरोधी दलों को उखाड़ फेंका और राज्य में बहुमत की सरकार बनाने में सफलता हाशिल की।

हालांकि इससे पहले बिहार विधानसभा चुनाव में बिहार की जनता ने मोदी और शाह की एक नहीं चलने दी, यहां नीतीश कुमार की जदयू, लालू यादव की आरजेडी और सोनिया गांधी की कांग्रेस पार्टी का महागठबंधन मोदी-शाह पर भारी पड़ा, लिहाजा इस चुनाव के बाद बीजेपी बिहार की सत्ता से बेदखल हो गई। लेकिन शायद बीजेपी को ये पसंद नहीं आय और बीजेपी फिर से सरकार में आने के रास्ते तलाशने लगी।

इसके कुछ साल बीतने के बाद साल 2017 के जुलाई और अगस्त महीने के बीच बिहार में ऐसी राजनीतिक भुचाल आई की तीन दलों का महागठबंधन टूट गया और महागठबंधन के मुखिय (बिहार के सीएम) नीतीश कुमार अपने पूराने सहयोगी बीजेपी के साथ मिल कर फिर से बिहार में NDA सरकार की गठन कर लिया, और अब बिहार में भी बीजेपी गठबंधन (जिसे NDA कहा जाता है) की सरकार है।

आपको बता दें कि महागठबंध से नीतीश कुमार के अगल होने को लेकर सबसे बड़ी वजह लालू यादाव और उनके बेटे के साथ पारिवार के अन्य सदस्यों के लिए भ्रष्टार के मामले में सीबीआई छापेमारी बनी, नीतीश ने इस हालात में वो सरकार नहीं चला सकते। बता दें कि नीतीश अपनी छवि को बरकरार रखने के लिए महागठबंध का साथ छोड़कर बीजेपी के साथ नई सरकार बना लिया।

इसके बाद अब बिहार और यूपी में अगली रेस की तैयारी जोरो पर है। बता दें कि सत्ता से बेदखल हुए लालू के लाल तेजस्वी यादव और यूपी में मुलायम सिंह यादव के बेटे अखिलेश यादव अब 2019 में मोदी-शाह नामक अश्वमेध रथ को रोकने के लिए अभी से राजनीतिक जमीन की तलाश में लगे हैं। बता दें कि बीजेपी और नीतीश के खिलाफ बिहार में तेजस्वी यादव जनादेश अपमान यात्रा पर हैं, तो यूपी में पूर्व सीएम अखिलेश यादव ने भारत छोड़ो आंदोलन की 75वीं वर्षगांठ पर केंद्र की नरेंद्र मोदी और प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार के खिलाफ 'देश बचाओ-देश बनाओ' का आगाज किया है।

loading...

Subscribe to our Channel