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मसूद अजहर बच निकला तो सुषमा ने इमरान खान को ही फंसा डाला!

नई दिल्ली: जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में भारतीय सुरक्षाबलों पर 14 फरवरी को हुए भीषण आतंकी हमले के लिए जिम्मेदार पाकिस्तानी आतंकी मसूद अजहर को एक बार फिर से चीन ने बचा लिया। हालांकि इसके बाद भी भारत पाकिस्तान के साथ शांति वार्ता को तैयार है, लेकिन इसके लिए पाकिस्तान को भारत के शर्तों को पालन करना होगा।

पाकिस्तान के साथ शांति वार्ता को लेकर भारत की विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने सीधे शब्दों में कहा कि, हम पाकिस्कतान से आतंकवाद मुक्त माहौल में बातचीत के लिए तैयार हैं। उन्होंने कहा कि आतकंवाद और बातचीत एक साथ नहीं हो सकते हैं। साथ ही उन्होंने इशारों ही इशारों में पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान को भी निशाने पर लिया।

स्वराज ने कहा, “कुछ लोग कहते हैं कि इमरान खान स्टेट्समैन और उदारवादी हैं, अगर वे इतने उदार हैं तो मसूद अजहर को भारत को सौंप दें”। आपको बता दें कि मसूद अजहर सिर्फ पुलवामा हमले के लिए ही नहीं बल्कि भारत में हुए अन्य कई भीषण आतंकी हमले के लिए जिम्मेदार है।

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बता दें कि इमरान खान प्रधानमंत्री बनने से पहले और प्रधानमंत्री बनने के बाद भी कई सार्वजनिक तौर पर यह कह चुके हैं कि वह आतंकवाद के खिलाफ हैं। लेकिन इसके बाद भी पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवादी भारत में आतंक फैलाने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं।

हालांकि भारतीय सेना आतंकवादियों को मुहतोड़ जवाब दे रही है, लेकिन सुषमा स्वराज का यह बयान इमरान खान को उनके ही जाल में फंसाने जैसा है। क्योंकि पाकिस्तान में मसूद अजर को सुरक्षा प्राप्त है। ऐसे में उसे भारत के हवाले करना इमरान खान के लिए एक ऐसी परीक्षा है, जिसमें वह कभी पास नहीं हो सकते है।

जानकारी के लिए बता दें कि, भारत पिछले काफी समय से मसूद अजहर को वैश्विक आतंवादी घोषित करवाने के प्रयास में लगा है, लेकिन यह चौथी बार है जब चीन की चालबाजियों के कारण ऐसा नहीं हो सका। गौर हो कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की ‘‘1267 अल कायदा सैंक्शन्स कमेटी'' के तहत मसूद अजहर को वैश्विक आतंकवादी घोषित करने का प्रस्ताव 27 फरवरी को फ्रांस, ब्रिटेन और अमेरिका द्वारा लाया गया था।

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कमेटी में शानिल सदस्यों के पास प्रस्ताव पर आपत्ति जताने के लिए 10 दिन का समय था, जो बुधवार को न्यूयॉर्क के समय के अनुसरा, दोपहर तीन बजे (भारतीय समयनुसार गुरुवार रात साढ़े 12 बजे) खत्म होनी थी। लेकिन इसके पहले चीन ने प्रस्ताव पर ‘तकनीकी रोक' लगा दी।

संयुक्त राष्ट्र में एक राजनयिक के हवाले से बताया गया कि, चीन ने प्रस्ताव की पड़ताल के लिए और समय मांगा है। बताया जाता है कि चीन द्वारा लगाई गई उक्त तकनीकी रोक छह महीनों के लिए मान्य है, जबकि इस समय अवधि के बाद इसे तीन और महीने के लिए बढ़ाया जा सकता है।

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