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राममंदिर नहीं, बाबरी पर सख्त हुई सुप्रीम कोर्ट, ...9 महीने में आए फैसला

नोएडा : राम मंदिर मामले में सुप्रीम कोर्ट की लेटलतीफी और बाबरी मस्जिद मामले में क्विक एक्शन लेना सुप्रीम कोर्ट पर बहुत सारे सवाल उठाते है। लेकिन सुप्रीम कोर्ट तो सुप्रीम है इसलिए हम इन पर सवाल नहीं उठा सकते। दरअसल बात यह हैं कि बाबरी विध्वंश मामले में सुप्रीम कोर्ट ने लखनऊ कोर्ट को यह आदेश दिया हैं कि वो जल्द ही 9 महीने में इस केस का निपटारा करें, जिसमें बीजेपी और वीएचपी के कई बड़े नेता शामिल है। इसके लिए कोर्ट ने यूपी सरकार को आदेश दिया हैं कि वो विशेष जज एस के यादव का सेवा विस्तार करें, जो इस केस की सुनवाई कर रहें हैं। इसके साथ ही उन्होंने यह भी आदेश दिया कि इस अवधि तक जज सिर्फ इसी केस की सुनवाई करेंगे।

 

गौरतलब हैं कि अप्रैल 2017 में सुप्रीम कोर्ट ने लालकृष्ण आडवाणी, उमा भारती, मुरली मनोहर जोशी, विनय कटियार समेत 14 नेताओं पर इस मामले में आपराधिक साजिश की धारा बहाल की थी। सीबीआई ने इस मामले में तकरीबन 21 नेताओं के खिलाफ अपील की थी, जिसमें से 7 नेता अब इस दुनिया में नहीं रहें। जबकि कल्याण सिंह को राजस्थान का राज्यपाल होने के चलते फ़िलहाल मुकदमे से छूट हासिल है।

आपको बता दें कि 2017 में दिए आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने माना था कि सिर्फ कुछ तकनीकी कारणों के चलते इस मुकदमा को लखनऊ और रायबरेली की अलग-अलग अदालतों में चलाया जा रहा है। जिस कारण बड़े नेताओं पर साज़िश की धारा भी नहीं लग सकी। इस केस की जटिलता को देखते हुए जस्टिस पी सी घोष और रोहिंटन नरीमन की बेंच ने इस अड़चन को दूर करते हुए दोनों मुकदमों को एक साथ लखनऊ में चलाने का आदेश दिया। जिसके बाद कोर्ट ने इस लंबी खींचे केस को 2 साल के भीतर निपटाने का आदेश दिया। आपको बता दें कि यह केस 6 दिसंबर 1992 में दर्ज हुई थी, जो अभी तक चल रहा है।

बता दें कि रायबरेली में जिन नेताओं पर मुकदमा चल रहा था, उन पर आईपीसी की धारा- 153A (समाज में वैमनस्य फैलाना), 153B (राष्ट्रीय अखंडता को खतरे में डालना) और 505 (अशांति और उपद्रव फ़ैलाने की नीयत से झूठी अफवाहें फैलाना) के तहत मामला दर्ज हैं।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद इसमें धारा 120B (आपराधिक साज़िश) भी जोड़ दी गई। जिससे अगर नेताओं पर पहले से चल रही धाराओं में अपराध साबित होता है तो 120बी की मौजूदगी के चलते उन्हें अधिकतम 5 साल तक की करावास की सज़ा मिल सकती है।

आपको बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने जिस केस की सुनवाई के लिए विशेष जज एस के यादव का सेवा विस्तार किया हैं, वे 30 सितंबर को सेवानिवृत्त होने वाले थे।

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