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धर्म के नाम पर वोट- चुनाव आयोग के जवाब से सुप्रीम कोर्ट नाराज, अधिकारी हुए तलब

नई दिल्ली: लोकसभा चुनाव के सियासी महासमर में विवादित बोल बोलने वाले नेताओं पर प्रयाप्त कार्रवाई न किए जाने को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग के प्रति नाराजगी जताई है। मामले से संबिधत एक याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने चुनाव आयोग के प्रतिनिधियों से मंगलवार को कोर्ट में पेश होने के निर्देश दिए हैं।

दरअसल, चुनाव आयोग की नसीहत के बाद भी नेता जाति-धर्म पर खुलेआम वोट मांग रहे हैं। न सिर्फ वोट मांग रहे हैं बल्कि एक दूसरे के लिए अभद्र भाषाओं का इस्तेमाल से भी धड़ल्ले से कर रहे हैं। ऐसे नेताओं के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए दायर की गई याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने चुनाव आयोग से जवाब तलब किए हैं।

आपको बता दें कि हाल ही में उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में महागठबंध के मंच से लोगों को संबोधित करते हुए बसपा प्रमुख मायावती ने मुसलमानों से खुलेआम कहा कि उनका वोट बंटना नहीं चाहिए। सभी महगठबंधन को वोट करे, कांग्रेस को वोट देकर अपना अधिकार बर्बाद न करे, कांग्रेस-बीजेपी एक ही है।

मायावती के इस अपील का हवाला देते हुए उत्तर प्रदेश के मौजूदा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि, मायावती और महागठबंधन को अली पर भरोसा है तो हमे बजरंग बली पर विश्वास है। उन्हें सिर्फ मुसलमानों का वोट चाहिए तो बाकी वोटरों के पास (बीजेपी के अलावा) और कोई विकल्प नहीं है।

मामले पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से पूछा कि, मायावती ने अपने धार्मिक आधार पर वोटिंग करने वाले बयान के नोटिस का जवाब नहीं दिया तो आपने क्या किया? इस सवाल के जवाब में आयोग ने कहा कि 'हमारी शक्तियां सीमित हैं।' आयोग के इस जवाब पर नाराजगी जताते हुए कोर्ट ने अलगी सुनवाई के दौरान चुनाव आयोग के अधिकारियों को भी शामिल होने को कहा है। मामले की अगली सुनाई मंगलवार को होगी।

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