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सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की निर्भया के दरिंदों की 'दया' याचिका, जल्द होगी फांसी

नई दिल्ली: देश को हिलाकर रख देने वाले निर्भया गैंगरेप के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने दोषियों द्वारा दायर की गयी सजा के खिलाफ समीक्षा याचिका को खारिज कर दिया है। साथ ही कोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को भी बरकरार रखा है। 

बतादें कि साल 2012 में दिल्ली की बिजी सड़क पर एक बस में निर्भया के साथ गैंगरेप की वारदात को अंजाम देने वाले चार दोषियों में से तीन की समीक्षा याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आ गया है। सप्रीम कोर्ट ने चार में से तीनों दोषियों द्वारा अपनी सजा पर समीक्षा याचिका दायर की थी। जिसे सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया है। साथ ही निचली अदालत के फैसले को भी लागू रखा है। इस मामले में निचली अदालत ने निर्भया गैंगरेप के आरोपियों को दोषी मानते हुए फांसी की सजा सुनाई थी। जिसके बाद चार में से तीन दोषियों ने सजा के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में समीक्षा याचिका लगातार फांसी की सजा को उम्रकैद में बदलने की गुहार लगाई थी। लेकिन कोर्ट ने देशभर में हो रही रेप की वारदातों और महिलाओं की सुरक्षा  को ध्यान में रखते ही एक नजीर पेश करने वाला फैसला लिया है। कोर्ट ने तीनों दरिंदों की याचिका को खारिज करते हुए निचली अदालत के फैसले को बरक़रार रखा है।

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इससे पहले इस मामले में निचली अदालत ने एक नाबालिग को छोड़कर सभी को मौत की सजा सुनाई थी। वहीँ एक दोषी राम सिंह ने जेल में ही आत्महत्या कर ली थी। वहीँ चार में से तीन आरोपियों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाई थी। जिसमें सोमवार को सुप्रीम कोर्ट के प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा, न्यायमूर्ति आर भानुमति और न्यायमूर्ति अशोक भूषण की पीठ साल 2012 के निर्भया गैंगरेप के आरोपी विनय शर्मा, पवन गुप्ता और मुकेश सिंह की याचिकाओं को खारिज कर दिया है। इस मामले में चौथे दोषी अक्षय ठाकुर ने कोई समीक्षा याचिका दायर नहीं की है।

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सोमवार को देशभर की निगाहें कोर्ट के फैसले पर टिकी थी कि कोर्ट देशभर में हो रही रेप के वारदातों को देखते हुए क्या फैसला लेता है? इसी गैंगरेप के बाद रेप के खिलाफ कड़े कानून लाने की मांग तेज हुई थी। जिसके बाद से लगातार देश भर में हो रहे रेप जैसे मामलों के खिलाफ कड़े कानून लाने की मांग उठ रही है। वहीँ कोर्ट के फैसले के बाद पीड़ित को न्याय मिलने की आस बढ़ गयी है। पीडिता के पिता ने कहा है कि वह अपनी बेटी के गुनाह्हारों को फांसी पर चढ़ते देखना चाहते हैं। आपको जानकारी के लिए बता दे कि 16 दिसंबर, 2012 को दिल्ली में एक 23 साल की पैरा-मेडिकल छात्रा के साथ चलती बस में गैंगरेप किया गया था। गैंगरेप में हैवानियत की साड़ी हदों को पार कर दिया गया था। गैंगरेप के 13 दिन बाद सिंगापुर के एक अस्पताल में पीडि़ता की मौत हो गई थी।

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