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इन चीजों के लिए जरूरी नहीं है आधार कार्ड, पढ़िए सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला

नई दिल्ली: आधार कार्ड को लेकर बुधवार को सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए संवैधानिक दर्जा दे दिया। इसके साथ ही कोर्ट ने कहा कि ऐसा नहीं है कि हर चीज के आधार अनिवार्य ही है। आधार मामले को लेकर जस्टिस सीकरी  ने कहा कि, आधार आम नागरिक की बड़ी पहचान बन गई है, पिछले कुछ दिनों में आधार की सबसे ज्यादा चर्चा हुई है।

आपको बता दें कि पिछले काफी दिनों से जारी चर्चाओं के बीच कोर्ट ने आधार को संवैधानिक दर्जा देते हुए साफ किया है कि आधार कहां जरूरी है और कहां नहीं।

कोर्ट ने कहा कि बैंक अकाउंट और मोबाइल से आधार लिंक करना जरूरी नहीं माना है। लेकिन साथ ही कोर्ट ने आधार को वित्त विधेयक की तरह पास किया जाना गलत नहीं माना है।

कोर्ट के अनुसार, 6 साल से 14 साल के बच्चों को आधार के कारण शिक्षा से वंचिंत नहीं किया जा सकता। CBSE और NEET  के लिए भी आधार जरूरी नहीं है। कोर्ट ने कहा कि किसी जरूरतमंद को प्रमाणीकरण की कमी के कारण लाभ से वंचित न किया जाए।

बच्चों का आधार बनाने का फैसला अभिभावक करेंगे और वयस्क होने के बाद वह खुद ही इसका फैसला करेगा। कोर्ट ने कहा कि अगर किसी बच्चे का आधार नहीं है तो उसे स्कूल दाखिले से रोका नही जा सकता।

कोर्ट ने कहा कि गरीमा के साथ जीवन जीना मौलिक अधिकार है और आधार से वंचित तबके को गरिमा मिल रही है। कोर्ट ने कहा कि अभी 99.76% लोग आधार से जुड़े हैं और अब उन्हें सुविधाओं से वंचित नहीं किया जा सकता।

आधार से व्यक्ति की निजता के खतरे को लेकर कोर्ट ने कहा कि इसका फैसला उच्च स्तर पर हो और इसमें हाई कोर्ट जज की भी भूमिका हो। हालांकि कोर्ट ने यह भी माना है कि यह एक हद तक निजता पर हमला है लेकिन  जरूरतों को भी देखना होगा।

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