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सुप्रीम कोर्ट का बड़ा आदेश: यह लोग नहीं पढ़ सकेंगे ताजमहल में नमाज...

आगरा: दुनिया के सात अजूबों में शामिल ताजमहल में मुस्लिम समुदाय द्वारा पढ़ी जाने वाले नमाज को लेकर देश की सबसे बड़ी अदालत सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा आदेश दिया है। कोर्ट ने कहा है कि ताजमहल में बाहरी लोग आकर नमाज नहीं पढ़ सकते हैं। उन्हें कोई और जगह तलाशनी होगी।

बतादें कि ताजमहल को अपनी जागीर समझकर उसमें धार्मिक कर्मकांड किये जा रहे हैं। जिसमें मुस्लिम समुदाय की नमाज भी शामिल है। ऐसे में सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने ताजमहल में नमाज पढने को लेकर बड़ा फैसला लेते हुए साफ़ कर फिया है कि ताजमहल परिसर में कोई भी बाहरी आकर नमाज नहीं पढ़ेगा

क्या है मामला   

दरअसल इस मामले को लेकर लम्बे समय से घमासान छिड़ा हुआ है। ताजमहल को मुस्लिम समुदाय अपनी जागीर समझते हैं तो हिन्दू समुदाय के कुछ लोग अपनी जागीर। दोनों के चक्कर में ताजमहल का बेड़ागर्क हो रहा है। कुछ ही समय पहले ताजमहल में स्थानीय मुस्लिम समुदाय के लोगों के नमाज पढ़ने के साथ ही बाहरी लोगों ने भी आकर नमाज पढ़ना शुरू कर दिया था! जिससे शुक्रवार को जुमे की नमाज के दौरान हालात बेकाबू होने लगते हैं।

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ऐसे कुछ समुदाय के लोगों ने इसका विरोध किया और नमाज के साथ ही शिव चालीसा का अभी पाठ कराने की मांग शुरू कर दी थी। ऐसे बाहरी लोगों का आकर नमाज पढने को लेकर विवाद सुप्रीम कोर्ट पहुँच गया। जिसके बाद सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने साफ़ कर दिया है कि ताजमहल सात अजूबों में शामिल है, यहां नमाज नहीं पढ़ सकते हैं। कोर्ट ने कहा कि नमाज किसी और जगह भी पढ़ सकते हैं। हालांकि, स्थानीय मुस्लिम समुदाय के लोग अभी भी ताजमहल परिसर में ही नमाज पढ़ सकते हैं।

कोर्ट में लगाई थी याचिका

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ताजमहल में स्थानीय नमाजियों द्वारा नमाज पढने के साथ साथ बाहरी नमाजियों को भी ताजमहल में नमाज पढने की इजाजत मांगी थी, वहीँ इसके बाद से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के इतिहास शाखा, अखिल भारतीय इतिहास संकलन समिति (ABISS) ने शुक्रवार को होने वाली नमाज़ पर रोक लगाने की मांग शुरू कर दी थी, तो कई धार्मिक अन्य संगठनों ने ताजमहल में शिव चालीसा कराने की मांग शुरू कर दी थी।

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