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498 ए: दहेज उत्पीड़न के मामले में सुप्रीम कोर्ट का कड़ा फैसला, पति की खैर नहीं!

नई दिल्ली: आईपीसी की धारा 498 ए के तहत दहेज उत्पीड़न के मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को अहम फैसला सुनाते हुए पिछले साल दो जजों की बेंच द्वारा सुनाए गए फैसले में बदलाव किया है। पिछले साल दो जजों की बेंच ने दहेज उत्पीड़न के मामले में पति और उसके परिवार को गिरफ्तारी से बचाने के लिए अधिकार दिया था, लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट के तीन जजों की बेंच ने ऐसे मामलों में बड़ा बदलाव करते हुए पति की गिरफ्तारी का रास्ता साफ कर दिया है।

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कहा कि शिकायतों के निपटारे के लिए परिवार कल्याण कमिटी की जरूरत नहीं है। साथ ही कोर्ट ने मामले में आरोपियों की तुरंत गिरफ्तारी पर लगी रोक हटाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा की पीड़ित की सुरक्षा के लिहाज से ऐसा करना जरूरी है। हालांकि कोर्ट ने यह भी साफ किया कि आरोपियों के लिए अग्रिम जमानत का रास्ता खुला है और ये अधिकार संबंधित अदालत के पास है।

कोर्ट के फैसले को अगर सीधे शब्दों में समजा जाए तो ऐसे मामले में पुलिस अब सीआरपीसी की धारा 41 के तहत काम करेगी, जिसमें आरोपी के खिलाफ पर्याप्त आधार होने पर गिरफ्तारी का प्रावधान रखा गया है। बता दें कि इससे पहले पिछले साल ऐसे ही मामलों के लिए सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि दहेज प्रताड़ना के केस में सीधे गिरफ्तारी नहीं होगी।

बता दें कि 27 जुलाई 2017 को दिए गए फैसले में कोर्ट ने कहा था कि दहेज उत्पीड़न के मामले को देखने के लिए हर जिले में परिवार कल्याण समिति बनाई जाए और समिति की रिपोर्ट के आधार पर ही यह तय होगा कि आरोपी की गिरफ्तारी होगी या नही। लेकिन दो जजों के बेंच द्वारा दिए गए इस फैसले से नाराज चीफ जस्टिस की अगुआई वाली तीन जजों की बेंच ने मामले पर फिर से सुनवाई करने के बाद नया आदेश जारी किया।

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