Breaking News
  • अयोध्या मामले में 2 अगस्त से खुली कोर्ट में सुनवाई, 31 जुलाई तक मध्यस्थता की प्रक्रिया
  • महाराष्ट्र में गोरखपुर अंत्योदय एक्सप्रेस पटरी से उतरी
  • अमरनाथ यात्रा पर आतंकी कर सकते हैं आतंकी हमला : सूत्र
  • कर्नाटक में कुमारस्वामी सरकार का शक्ति परीक्षण, 2 बसों में विधानसभा पहुंचे BJP विधायक

अयोध्या विवाद पर स्वामी की नई दलील, सुप्रीम कोर्ट से जरूरी नहीं है मंजूरी

नई दिल्ली: मोदी सरकार का दूसरा कार्यकाल शुरू होते ही राम मंदिर निर्माण का मुद्दा फिर से गरमाने लगा है। प्रचंड बहुमत के साथ सत्ता में लौटी सरकार से लोगों की अपेक्षाएं बढ़ने लगी है। इस बीच बीजेपी के ही वरिष्ठ नेता सुब्रमण्यन स्वामी ने अयोध्या भूमि विवाद को लेकर एक ऐसा ट्वीट किया जिससे सियासी बवंडर मच सकता है।

अक्स अपने बयानों से अपनी ही सरकार की फजीहत कराने वाले स्वामी ने ट्वीट कर कहा कि, उन्होंने पीएम मोदी से राम मंदिर निर्माण के लिए जमीन आवंटित करने की मांग की है। उनका कहना है कि राम मंदिर निर्माण के लिए भूमि आवंटित करने के लिए सरकार को सुप्रीम कोर्ट से कोई अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है। यह जमीन अभी भारत सरकार के कब्जे में हैं।

आपको बता दें कि अयोध्या भूमि विवाद का मसला पिछले काफी समय से कोर्ट-कचहरी का चक्कार काट रहा है। फिलहाल मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधिन है। जहां इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस फैसले पर सुनवाई चल रही है जिसमें कोर्ट मे विवादित भूमि को तीनों पक्षों के बीच बांटे जाने का फैसला सुनाया था। इससे इतर कोर्ट मामले का आपसी समति से हल निकालने के भी रास्ते तलाश रही है।

ऐसे में सरकार से भूमि आवंटिक करने की मांग कोर्ट के प्रयाशों पर पानी फेर सकता है। हालांकि धर्मसेना अध्यक्ष और 1992 में विवादास्पद ढाचें को गिराने के मुख्य आरोपियों में से एक सन्तोष दूबे ने सुब्रमण्यम स्वामी को बहादुर बताते हुए उनकी मांग को सही ठहराया है। दूबे ने कहा कि स्वामी बहादुर है, वो जो कहते है करके दिखाते है। अब मोदी सरकार को चाहिए कि संविधान के दायरे में रहते हुए कानून बनाकर जल्द से जल्द मंदिर निर्माण शुरू करवाएं। साथ ही सन्तोष दूबे ने अयोध्या में राम मंदिर निर्माण को लेकर चल रहे संत समागम को ढोंग करार दिया है।

loading...