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कारगिल जिसमें भारत ने एक बार फिर पाकिस्तान को उसकी औकात दिखाई, जानिए यह गौरव गाथा

नोएडा : कारगिल एक ऐसी विजय गाथा जो हमारे सीने को ही चौड़े नहीं करता बल्कि हमारे आंखों को भी नम करता है। यह एक ऐसा विध्वंशक युध्द था, जिसका आगाज तो पाकिस्तना ने किया, लेकिन अंत भारत ने। बता दें कि भारत के आजादी के बाद से ही पाकिस्तान हमेशा ऐसी गतिविधियां करता रहा है जिससे वह भारत पर अपना दबदबा कायम रख सकें। लेकिन भारत ने हमेशा अपने सूझबूझ और ताकत के बल पर पाकिस्तान को अपने सामने घुटने टेंकने को मजबूर कर दिया था। अगर हम 1965 के युद्ध को छोड़ दें तो भारत ने हर युद्ध में पाकिस्तान को अपने जज्बों के आगे झुकाया है।

लेकिन आज हम बात करेंगे कारगिल युध्द की। जिसने पूरे देश का ध्यान भारत की ओर खिंचा। यह युध्द तकरीबन दो माह तक चला। जिसमें एक तरफ 30 हजार भारतीय सैनिक तो दूसरी तरफ 5000 घुसपैठिए एवं पाकिस्तानी सैनिक शामिल थे। हालांकि पाकिस्तान इस बात से सरासर इंकार करता रहा हैं, लेकिन युद्ध में बरामद हुए दस्तावेजों और पीकिस्तानी नेताओं के बयान से यह साबित हो गया कि इस युद्ध में पाकिस्तानी सैनिक भी शामिल थे।

इस युद्ध में भारत की तरफ से बड़ी संख्या में रॉकेट और बमों का इस्तेमाल किया गया था। इस दौरान लगभग दो लाख पचास हजार गोले दागे गए थे। वहीं 5,000 बम फायर करने के लिए 300 से ज्यादा मोर्टार, तोपों और रॉकेटों का इस्तेमाल भी किया गया। युद्ध के अंतिम 17 दिनों में हर रोज प्रति मिनट में एक राउंड फायर किया गया। बताया जाता है कि यह युद्ध, द्वितीय विश्व युद्ध जैसा ही था। जिसमें द्वितीय विश्व युद्ध जैसा दृश्य देखने को मिला। चारों तरफ गोलियों की गूंज, बम एवं बारूदों की विस्फोटक आवाज़, आसमान को छूते काले धुएं इस बात के गवाह थे कि यह युद्ध कितना प्रलयंकारी है।

इस युद्ध में देश ने लगभग 527 वीर जवानों को खोया, वहीं 1300 जवान घायल थे।

वैसे तो पाकिस्तान ने इस युद्ध की शुरूआत 3 मई 1999 को ही कर दी थी जब उसने कारगिल की ऊँची पहाड़ियों पर 5,000 सैनिकों के साथ घुसपैठ किया था। इस बात की जानकारी वहीं के स्थानीय किसान को मिली, जब वह अपने भेड़ें चराता हुआ इस इलाके में गया था। इस बात की जानकारी जब भारतीय सैनिकों को मिली तो सेना ने पाक सैनिकों को खदेड़ने के लिए ऑपरेशन विजय चलाया।

बता दें कि इस युद्ध में भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान के खिलाफ मिग-27 और मिग-29 का भी इस्तेमाल किया। जिसकी मदद से भारत ने कारगिल के युद्ध में पाकिस्तान को धूल चटा दिया और फतह हासिल की।

अंगारों पर चलकर हमने आजादी को पाया था,

पाकिस्तान बन भाई हमारा, फिर हमें ललकारा था।

हमने दी थी शिकस्त, झंडे बुलंदी का लहराकर,

एक बार फिर लहराया तिरंगा, भारत माता की जयकारों पर।

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