Breaking News
  • अंडमान के हैवलॉक द्वीप पर 800 टूरिस्टं फंसे, नेवी का रेस्यूंद्र ऑपरेशन
  • राज्यसभा और लोकसभा में नोटबंदी पर हंगामा
  • श्रीहरिकोटा: सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से दूरसंवेदी उपग्रह RESOURCESAT-2A का सफल प्रक्षेपण

गुरुनानक जयंती पर नानक से जुड़े कुछ रोचक तथ्य!

नई दिल्ली: आज दुनिया भर में सिख समुदाय के दश गुरुओं में से पहले गुरू ‘गुरु नानक देव जी’ का जयंती मनाया जा रहा है। नानक का जन्म कार्तिक पूर्णिमा के दिन सन 1469 में हुआ था। इसके अलावा आज देश के पूर्व औ प्रथम प्रधानमंत्री पं. जवाहरलाल नेहरू का भी जन्मदिन मनाया जा रहा है।

नानक का जन्म 15 अप्रैल 1469 में हुआ था लेकिन उनका जन्मदिन कार्तिक पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है। नानक ने ईश्वर और मोक्ष की प्रपत्ती के लिए लोगों को प्यार और सरल मार्ग की शिक्षा दी। नानक को मोक्ष प्राप्ती के एक मार्ग की तरह देखा जाता है।

नानक का जन्म 1469 में राएभोए के तलवंडी नामक स्थान में, कल्याणचंद  नाम के एक किसान के घर हुआ था। उनकी माता का नाम तृप्ता था, तलवंडी को ही नानक के नाम पर अब ननकाना साहब कहा जाता है, जो वर्तमान में पाकिस्तान में है।

गुरु नानक देव को लेकर समाज मे कई कहानियां प्रचलित है, ऐसा ही एक किस्सा है, जब नानक भ्रमण करते हुए सैदपुर पहुंचे। बताया जाता है कि यहां का बेईमान मुखिया गरीब किसानों से अधिक लगान वसूलता था।

लेकिन जब उसने नानक की आने खबर सुनी तो वह नानक को अपने घर में ठहारान चाहता था, लेकिन नानक ने अपने ठहरने के लिए एक गरीब का घर का चुनाव पहले ही कर लिया था, और जब इसकी जानकारी मुखिया को लगी तो उसने नानक के लिए भव्य कार्यक्रम का आयोजन कर उन्हें निमंत्रण भेजा, लेकिन नानक ने इस निमंत्रण को ठुकरा दिया।

जिसके बाद गुस्से में मुखिया ने नानक को अपने यहां लाने का हुक्म दिया, और जब नाननक उसके घर पहुंचे तो उसने कहा कि हम आप के लिए इतना प्रबंध किए है, और आप उस गरीब के यहा ठहर रहे है। जिसके जवाब में नानक ने कहा कि मैं तुम्हारा भोजन नहीं खा सकता, क्योंकि तुमने गरीबों का खून चूसकर ये रोटी कमाई है।

मुखिया ने नानक से इस बात को साबित करने के लिए कहा, जिसके बाद नानक ने गरीब के घर का एक रोटी हाथ में लिया और दूसरे हाथ में मुखिया के यहां की रोटी ली, और दोनों को निचोड़ा, इस दौरान गरीब की रोटी से दूध और मुखिया की रोटी से खून टपकने लगा। यह देखकर मुखिया नानक के कदमों में जागिरा, और फिर उसकी आँख खुली और वह भी इमानदारी के रास्ते पर चलने के लिए मजबूर हो गया।