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सपा सांसद बर्क नहीं बोल सके वंदे मातरम, कहा ‘वंदे मातरम’ …खिलाफ

नोएडा : जिस वंदे मातरम के लिए न जाने मां भारती के कितने लाल हंसते-हंसते कुर्बान हो गए। उसी वंदे मातरम पर आज संसद से सड़क तक संग्राम मचा है। जनता के वोटों से चुनकर देश के मंदिर में पहुंचे सांसदों ने वंदे मातरम की नई परिभाषा तय कर दी, तो कुछ ऐसे भी रहे जिनका मजहब वंदे मातरम की इजाजत नहीं देता। इससे पहले कि इस पूरे विवाद से पर्दा उठाए, आपके लिए यह जानना जरूरी है कि आखिर वंदे मातरम हैं क्या?

आज बंकिम चंद्र चटर्जी स्वर्ग में बैठे छाती पीट रहे होंगे। क्योंकि उनके वंदे मातरम पर ससंद से सड़क तक संग्राम मचा है। इस संग्राम की पूरी कहानी भी बताएंगे लेकिन पहले यह समझिए कि वंदे मातरम का अर्थ है क्या, यहां वंदे मातरम् का अर्थ मां की वंदना करने से है। अब भला मां की वंदना से किसे परहेज हो सकता है। क्या मां किसी धर्म या जाति से आती हैं? क्या मां का धर्म हिंदू हैं, या मुसलमान है, या सिख या फिर ईसाई। मां तो मां है, फिर मां की वंदना से परहेज कैसा? लेकिन नहीं अखिलेश यादव के सांसद को यह मंजूर नहीं...

ये तस्वीरें 17 वीं लोकसभा के दूसरे दिन की है। जब संभल से चुनाव जीत कर संसद पहुंचे सामाजवादी पार्टी के सासंद शफीकुर्ररहमान बर्क संविधान की शपथ लेने पहुंचे थे। बर्क जैसे ही अपनी सीट से उठकर आगे बढ़े, किसी ने आवाज लगाई। आइए बर्क साहब। वंदे मातरम। लेकिन सांसद महोदय ने कुछ नहीं कहा, आगे बढ़े और शपथ लेना आरंभ किया।

बर्क का शपथ

बर्क का उर्दू में शपथ लेना उतना हैरान नहीं करता जितना हैरान अब आप होने वाले हैं। शपथ लेने के बाद बर्क ने संविधान जिंदाबाद का नारा लगाया। इतने पर चुप हो जाते तो कोई बात नहीं लेकिन शायद आज बर्क भी आर-पार के मूड में थे। शपथ लेने के बाद उन्होंने वंदे मातरम नहीं बोला, लेकिन इसके खिलाफ अपनी अनोखी थेथीस जरूर पेश की। कहा वंदे मातरम इस्लाम के खिलाफ है, उनके इतना कहते ही पूरा संसद वंदे मातरम से गूंज उठा और बर्क बिना सिंग्नेचर किए उल्टे पांव चल दिए।

हालांकि बर्क के लिए ये कोई पहला मौका नहीं था, जब उन्होंने वंदे मातरम से बगावत की हो बल्कि इससे पहले भी वह कई मौके पर वंदे मातरम के खिलाफ बगावती सुर अख्तियार कर चुके हैं। लेकिन शायद किसी ने उम्मीद नहीं कि थी कि पवित्र संसद में खड़े होकर भी अखिलेश यादव के सांसद वंदे मातरम के खिलाफ बगावती राग अलाप सकते हैं, लेकिन उन्होंने नामुमकीन को मुमकीन कर दिखाया।

वहीं जब बर्क को लेकर अखिलेश यादव से सवाल किया गया तो वे इससे कन्नी काटते नज़र आएं। इधर बर्क के बगावत पर गोरखपुर से बीजेपी सासंद रवि किशन कुछ ज्यादा ही बोल गए। उन्होंने बर्क को न सिर्फ पागल कहा बल्कि इसके लिए उनकी ढलती उम्र को भी जिम्मेदार बताया। बता दें कि ये वही रवि किशन हैं जो संसद में संविधान की शपथ लेते हुए पूरे फिल्मी हो चुके थे, जैसे वो संसद में नहीं बल्कि किसी फिल्म के सेट पर फिल्मी डायलॉग का रिहर्सल चल रहा है।

हालांकि रवि किशन ऐसे पहले सासंद नहीं थे, जिन्होंने पवित्र संसद को चुनावी रंजिश का अखाड़ा बनाया हो बल्कि इससे पहले जो हुआ, वो और भी हैरान करने वाला है। ये सभी जनता के जनप्रतिनिधि है, जो जनहित पर चर्चा के लिए बने संसद को धर्म संसद बना डाला। धार्मिक नारेबाजी में शामिल बंगाल के जनप्रतिनिधियों के रगों में अलग ही उबाल दिखा, किसी ने संसद में शपथ लेने के बाद तो किसी ने शपथ लेने से पहले ही अपने रगो का उबाल दिखा दिया।

इनमें एक नाम हैदराबाद से सांसद ओवैसी का भी है, जो शपथ लेने के बाद अल्लाह की इबादत करते दिखें। साथ ही उन्होंने एक ऐसी बात भी कही जो इन दिनों हर हिंदुस्तानी और खास कर बिहारियों का कलेजा कचोट रहा है।

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