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कांग्रेस में फिर गांधी, नहीं कोई दूसरा चेहरा और पपेट कहने पर भी एतराज

नोएडा : 72 दिनों से जारी लगातार ऊहापोह के बाद भी आखिरकार कांग्रेस को अपना अध्यक्ष नहीं मिला, लेकिन इस कुर्सी की भरपाई के लिए सोनिया को कांग्रेस का अंतरिम अध्यक्ष बना दिया गया। यानी कहा जाए तो फिर ढ़ाक के तीन पात। बता दें कि 10 अगस्त को दिल्ली में कांग्रेस के CWC की बैठक थी, जिस दौरान कांग्रेस अध्यक्ष समेत जम्मू-कश्मीर से हटाए गए 370 पर भी चर्चा होना था। हालांकि 370 पर कांग्रेस दो भागों में दिखीं, वहीं कांग्रेस अध्यक्ष के लिए एक बार फिर राहुल के नामों की चर्चा हुई। मगर राहुल ने इन सभी बातों को सिरे से खारिज कर दिया। जिसके बाद एक बार फिर सोनिया के नामों की चर्चा हुई।

सोनिया ने भी अपने नामों को लेकर इससे खुद को किनारा कर लिया। जिसके बाद राहुल इस बैठक से अपने लोकसभा क्षेत्र वायनाड की ओर रूस्तगी कर गए। इस बैठक का नतीजा दिन भर बेनतीजा निकला। पुनः इस बैठक को रात 8 बजे करने की घोषणा की गई। जिसमें कांग्रेस के तमाम नेता समेत सोनिया और प्रियंका भी मौजूद रहीं, राहुल नामौजूद रहें। इसके बाद इस बैठक में गैरकांग्रेसी नेता को कांग्रेस के अध्यक्ष बनाने के नामों की चर्चा हुई, जिस दौरान कुछ नामों के प्रस्ताव भी रखे गए। ऐसा माने जाने लगा कि कांग्रेस नेता मुकुल वासनिक इस पार्टी के अध्यक्ष बनाए जाएंगे। लेकिन इस दौरान जो तर्क दिए जाने लगे वो काफी तर्कपूर्ण दिखा।  कांग्रेस के एक नेता ने कहा कि अगर कोई गैर कांग्रेसी अध्यक्ष बना तो विरोधी गांधी परिवार का पपेट कहेंगे।

जिसके बाद सोनिया को एक बार फिर राहुल को मनाने को कहा गया। लेकिन राहुल अपने बात पर अडिग रहे, जिसके बाद सोनिया को इस जिम्मे को संभालने को कहा गया। और अंत में सोनिया को अंतरिम अध्यक्ष बनाया गया। बता दें कि सोनिया के नामों के प्रस्ताव के दौरान काफी गहमागहमी दिखा। सोनिया के नामों का प्रस्ताव पी.चिदंबरम ने रखा। जिस पर सोनिया ने 'NO' कह दिया। जिस पर बैठक में मौजूद प्रियंका गांधी ने भी इस पर ऐतराज जता दिया। हालांकि, प्रियंका ने कहा कि अगर सोनिया तैयार हैं तो कोई क्या कह सकता है? तभी एके अंटोनी बोला कि ऐसा नहीं हो सकता।

इस पर कांग्रेस के यूथ नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया ने उन्हें बैठने के लिए कहा, और बोला कि ऐसा क्यों नहीं हो सकता? ऐसा होना ही चाहिए। जब राहुल गांधी CWC का फैसला मानने को तैयार नही हैं तो मैडम को आगे आना ही चाहिए। वहीं बैठक में मौजूद अम्बिका सोनी, आशा कुमारी और कुमारी शैलजा ने कहा कि गांधी परिवार के बिना पार्टी नहीं चल सकती और सोनिया से राहुल को मनाने के लिए कहा। लेकिन गांधी ने साफ कर दिया कि राहुल के फैसले पर वो क्या कह सकती हैं?

इस पर तीनों नेताओं ने सोनिया से स्पष्ट कह दिया कि इस सूरत में उन्हें पार्टी संभालनी ही पड़ेगी। जिसके बाद बैठक में मौजूद सभी सदस्य इस बात को दोहराने लगे और अंत में सोनिया को यह मानना पड़ा।

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