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फिर सोनिया बनी संसदीय दल की नेता, सामने यह अहम चुनौतियां

नई दिल्ली : कांग्रेस संसदीय दल (सीपीपी) की बैठक में सोनिया गांधी एक बार फिर संसदीय दल की नेता चुनी गई है। जिस बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी व पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के अलावा पार्टी के कई वरिष्ठ नेता मौजूद थे। फिर से नेता चुने जाने पर सोनिया ने कांग्रेस को वोट करने वालों का धन्यवाद किया। आपको बता दें कि यह मीटिंग पिछले हफ्ते से ही चल रही है, जिस दौरान कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गोंधी ने अपने इस्तीफे की पेशकश की थी। हालांकि अभी तक इस इस्तीफे को स्वीकार नहीं किया गया है।

सूत्रों की माने तो राहुल गांधी दो से तीन माह तक इस पद पर बने रह सकते है। कांग्रेस अध्यक्ष के चयन के बाद राहुल इस पद को छोड़ देंगे और वे एक कार्यकर्ता की तरह इस पार्टी का हिस्सा बने रहेंगे। लेकिन इससे पहले कांग्रेस के सामने भी एक बड़ी समस्या है वह यह कि उसके सामने प्रतिपक्ष नेता बनने की चुनौती है। क्योंकि विपक्ष का दर्जा हासिल करने के लिए कांग्रेस के पास 55 सांसद होने जरूरी है। जबकि उसके पास 52 ही सांसद है। अब वो इस पद को हासिल करने के लिए कौन सा कदम उठाती है, वह देखनेलायक रहेगा।

क्योंकि विपक्ष का पद हासिल करने के लिए कांग्रेस को सपा औऱ बीएसपी से समझौता करना पड़ेगा, जिससे उन्होंने लोकसभा चुनाव के दौरान गठबंधन नहीं किया था। अब कांग्रेस को या तो सपा औऱ बीएसपी से मदद लेना पड़ेगा या उसे किसी अन्य दल या निर्दलीय सांसद को अपने पाले में लाना होगा। अब देखते है कांग्रेस अपनी इस बैठक में कौन सा राह ढूंढ़ निकालती है। आपको बता दे कि लोकसभा चुनाव 2019 में बीजेपी ने 303 सीट हासिल कर सबसे बड़ी पार्टी होने का गौरव हासिल किया वहीं अपने सहयोगी दलों के जरिए 353 सीट हासिल किया है।

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