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तो महिलाओं के खिलाफ़ नहीं चलेगा कोई भी ऐसा केस...!

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने महिलाओं के खिलाफ रेप और उत्पीड़न जैसे मामलों को चलाने के लिए दायर की गयी याचिका को खारिज कर दिया है। साथ ही कोर्ट ने कहा कि यह काम संसद का है उसी को इसपर विचार करना चाहिए। आईपीसी में महिलाओं के खिलाफ़ इस तरह के केस चलाने का कोई जिक्र नहीं किया गया है।

बतादें कि वरिष्ठ वकील ऋषि मल्होत्रा द्वारा देश की सबसे बड़ी अदालत में महिलाओं द्वारा पुरुषों का रेप और उत्पीडन को लेकर दायर की गयी याचिका को खारिज कर दिया गया है। शुक्रवार को CJI दीपक मिश्रा की बेंच ने सुनवाई करते हुए महिलाओं द्वारा पुरुषों का रेप और उत्पीड़न जैसे मामलों में महिलाओं को भी पुरुषों की तरह ही दंडित किये जाने को लेकर लगाई गयी याचिका को खारिज करते हुए कहा है कि इसको लेकर संसद को तय करना है कि वह क्या चाहती है? CJI की बेंच ने सुनवाई के दौरान कहा कि ये संसद का काम है और वही इस पर फैसला ले सकती है।

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याचिका में सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश का हवाला दिया गया था जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने व्यभिचार कानून पर फिर से विचार करने की सहमित जताई है। वकील ने याचिका में मांग की थी कि अगर महिला द्वारा किसी पुरुष का रेप या उत्पीड़न का मामला दर्ज करवाया जाता है तो उस महिला के खिलाफ़ भी पुरुषों की तरह समान केस चलाया जाए।

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जबकि देश में विद्धमान 158 साल पुरानी आईपीसी में इस तरह का किसी कानून जिक्र नहीं है कि कोई महिला किसी पुरुष का रेप या उत्पीड़न कर सकती है। यहाँ पुरुष समाज को ही दोषी माना जाता है।

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