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सवर्णों को 10% आरक्षण पर बुरी खबर, राज्यसभा में नहीं बनी बात!

नई दिल्ली: इस साल होने वाले लोकसभा चुनाव से ठीक पहले सामान्य वर्ग के गरीबों के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण के प्रस्ताव को मंजूरी देकर केंद्र की सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी ने नाराज सवर्णों को अपने पाले में लाने की बड़ी कोशिश की है। सरकार अपनी कोशिश में कामयाब होती भी दिख रही है, क्योंकि सोमवार को कैबिनेट से मंजूरी मिलने के बाद मंगलवार को इस प्रस्ताव को लोकसभा में पेश किया और पास भी करा लिया गया।

वहीं बुधवार को प्रस्ताव संसद के उच्च सदन यानी राज्यसभा में भी पेश किया गया। लेकिन राज्यसभा में मोदी सरकार के पास बहुमत नहीं है, लिहाजा यहां से इसे पास करना सरकार के लिए अग्नि परीक्षा होगी। हालांकि इससे पहले खबर थी कि राज्यसभा में लोकसभा की तरह लगभग सभी दलों के सदस्य संबंधित बिल का समर्थन करेंगे। लेकिन ऐसा हुआ नहीं, क्योंकि बुधवार को संसद की कार्यवाही शुरू होते ही बिल पेश किया गया, जिसपर भारी हंगामा हुआ और सदन की कार्यवाही दो बजे तक के लिए आगे बढ़ा दी गई।

आपको बता दें कि राज्यसभा में आज विपक्षी दलों ने सदन की कार्यवाही एक दिन बढ़ाए जाने को लेकर भारी विरोध और हंगामा किया। साथ ही इस बिल को भी सेलेक्ट कमेटी के पास भेजे जाने की मांग की है। गौर हो कि संसद का शीतकालीन सत्र मंगवार 8 जनवरी को ही समाप्त हो रही थी, लेकिन दावा किया जा रहा है कि सामान्य वर्ग के गरीबों आरक्षण दिलाने वाले बिल के लिए ही एक दिन की कार्रवाही बढ़ाई गई है।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इससे पहले मंगलवार को लोकसभा में करीब लगभग पांच घंटे की चर्चा के बाद ये बिल पास हुआ था। लोकसभा में इस बिल के समर्थन में 323 वोट पड़े जबकु विरोध में महज 3 ही वोट पड़े थे। बता दें कि संविधान में आर्थिक आधार पर किसी भी वर्ग को आरक्षण दिए जाने का प्रावधान नहीं है, लिहाजा इसके लिए सबसे पहले संविधान संशोधन करना होगा, और इसकी मंजूरी संसद सदस्यों से लेनी है।

जिसके लिए बिल संसद को दोनों सदन में पेश किया गया है। इससे पहले लोकसभा से बिल पास हो चुका है, जबकि राज्यसभा में बुधवार को दो बजे से चर्चा की उम्मीद की जा रही है, लेकिन इससे पहले सदन में अन्य मुद्दों को लेकर हंगामा और बिल को सेलेक्ट कमेटी के पास भेजे जाने का मसला खतरे की घंटी बजा रहा है।

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