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राजनाथ ने लगाया विपक्ष पर वादाखिलाफी का आरोप, कहा अपने वादे से पीछे हटे, क्या हैं वह वादा

नोएडा: सत्ता और सियासत की चाहत किस कदर हावी होता है, इसका दिलचस्प नजारा इन दिनों भारत के संसद में दिख रहा है। एक तरफ जहां कर्नाटक के नाटक को लेकर चार दिनों तक कर्नाटक सरकार में असमंजस की स्थिति थी, तो वहीं दूसरी तरफ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयानों को लेकर लोकसभा संसद में बवाल खड़ा हो उठा है। और विपक्ष, पीएम मोदी से जवाब की मांग कर रहें है। हालांकि इस मुद्दे पर सत्तापक्ष की ओर से विदेश मंत्री एस जय शंकर और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह सफाई पेश कर चुके हैं लेकिन वो फिर भी इस मुद्दे पर पीएम मोदी की सफाई की मांग कर रहें है।

राजनाथ सिंह ने लोकसभा में कहा कि, ''कांग्रेस नेता की ओर से कहा गया था कि मुद्दा उठाने की इजाजत दी जाए, उसके बाद सत्ता पक्ष की ओर से जो भी कहा जाएगा उसे मैं सुनूंगा। लेकिन ऐसा ना करके उन्होंने वादाखिलाफी की है। जहां तक हमारे प्रधानमंत्री और अमेरिका के राष्ट्रपति के बीच बातचीत का प्रश्न है तो यह सच है कि जून के महीने में दोनों के बीच बात हुई थी। लेकिन हमारे विदेश मंत्री ने बयान देते समय यह स्पष्ट कर दिया है कि कश्मीर के मुद्दे पर कोई बातचीत नहीं हुई थी। मैं समझता हूं कि इससे प्रमाणित बयान किसी का नहीं हो सकता क्योंकि जब मोदी जी और ट्रंप के बीच बातचीत हो रही थी तो जयशंकर जी वहां मौजूद थे।''

जिसके बाद सिंह ने कहा, ''मैं यह भी स्पष्ट करना चाहता हूं कि कश्मीर के मुद्दे पर किसी की मध्यस्थता स्वीकार करने का कोई सवाल ही पैदा नहीं होता। क्योंकि हम इस सच्चाई को जानते हैं कि यह निश्चित तौर पर शिमला समझौते के खिलाफ होगा। कश्मीर के मुद्दे पर हम किसी की मध्यस्थता इसलिए भी स्वीकार नहीं करेंगे क्योंकि यह हमारे राष्ट्रीय स्वाभिमान का विषय है। हम हर चीज से समझौता कर सकते हैं लेकिन राष्ट्रीय स्वाधीनता से समझौता नहीं कर सकते। मैं भी स्पष्ट करना चाहता हूं कि अगर पाकिस्तान से बात होगी तो सिर्फ कश्मीर पर नहीं बल्कि पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर पर भी होगी।'' हालांकि राजनाथ सिंह के इस बयान के समय विपक्ष वॉकआउट कर गया था।

बता दें कि विपक्ष के हंगामे के बाद मंगलवार को विदेश मंत्री एस जयशंकर ने बयान दिया था। उन्होंने कहा था कि, ''मैं स्पष्ट तौर पर सदन को आश्वस्त करना चाहता हूं कि मोदी ने कभी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प से मध्यस्थता के लिए नहीं कहा। कश्मीर भारत-पाक का द्विपक्षीय मुद्दा है। इसे दोनों देश मिलकर सुलझाएंगे। पाकिस्तान पहले आतंकवाद पर लगाम लगाए। कश्मीर मसले पर शिमला और लाहौर संधि के जरिए ही आगे बढ़ेंगे।'' दौरतलब हैं कि इससे पहले विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता भी रवीश कुमार ने भी अमेरिकी राष्ट्रपति के बयान का खंडन किया था। उन्होंने भी कहा था कि पीएम मोदी की ओर ऐसी कोई भी मांग नहीं की गई।

इमरान खान का वह बयान, जिस पर मचा है घमासान

बता दें कि अमेरिका राष्ट्रपति ने इमरान खान की मौजूदगी में कहा, ''मैं दो हफ्ते पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ था। हमारे बीच इस मसले पर बातचीत हुई। उन्होंने मुझसे पूछा कि क्या आप इस मसले पर मध्यस्थता करना चाहेंगे। मैंने पूछा- कहां। उन्होंने कहा कि कश्मीर. मैं आश्चर्यचकित हो गया। यह मसला काफी लंबे समय से चला आ रहा है।'' ट्रंप ने आगे कहा, ''मुझे लगता है कि वे हल चाहते हैं, आप हल चाहते हैं और अगर मैं मदद कर सकता हूं तो मुझे मध्यस्थता करके खुशी होगी। दो बेहद शानदार देश, जिनके पास बहुत स्मार्ट लीडरशिप है वे इतने सालों से ये मसला हल नहीं कर पा रहे हैं। अगर आप चाहते हैं कि मैं मध्यस्थता करूं तो मैं यह करूंगा।'' ट्रेप के इस बयान के बाद ही पूरे भारत में घमासान मचा हुआ है।

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