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‘थिंक टैंक’ नीति आयोग ने ही बढ़ाई सरकार की टेंशन, मारी बातों से पलटी

नई दिल्ली : तीन तलाक और धारा 370 जैसे जटिल मसलों का समाधाना निकालने वाले प्रधानमंत्री मोदी कितने बड़े नेता है, इसका अंदाजा पीएम मोदी के उन बयानों से लगाइये जो उन्होंने फ्रांस में एक मंच को संबोधित करते हुए दिया। एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रधान सेवक ने कुछ ऐसा कहा कि पूरा सभागार मोदी-मोदी के शोरों में डूब गया। तालियों की गड़गड़ाहट ऐसी की वाचाल मोदी की रफ्तार भी धीमी पड़ गई। लेकिन क्या वाकई पीएम मोदी जो कह रहे हैं वो सच है। ये बातें भले ही पीएम ने फ्रांस की धरती से की है। लेकिन इससे पहले भारत की संसद में भी पीएम मोदी 5 ट्रिलियन अर्थव्यवस्था के सपने दिखा चुके हैं। लेकिन सवाल है कि क्या ये सपने पूरे होंगे? और वो भी तब जब सरकार का थिंक टैंक सरकार के फैसले पर सवाल खड़े कर लीक से हट कर सोचने की सलाह दे रहा है।

दरअसल, एक ओर पीएम मोदी भारत को 5 ट्रिलियन अर्थव्यवस्था के सपने दिखा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ सरकार को सलाह देने वाली संस्‍थान नीति आयोग के उपाध्यक्ष ने कुछ ऐसा बयान दियास कि 56 इंच वाली छाती सीकुड़ने लगी। सुनिए की नीति आयोग के वाइस चेयरमैन राजीव कुमार ने सरकार को क्या सलाह दिया है।

सरकार से निजी कंपनियों को भरोसे में लेना चाहिए

पिछले 70 साल में ऐसी स्थिति का सामना नहीं किया

पूरी वित्तीय प्रणाली खतरे में है

नोटबंदी और जीएसटी के बाद कैश की किल्लत बढ़ी है

कोई किसी पर भी भरोसा नहीं कर रहा

प्राइवेट सेक्टर में कोई भी कर्ज देने को तैयार नहीं है

हर कोई नगदी दबाकर बैठा है

सरकार को लीक से हटकर फैसले लेने होंगे

लेकिन सरकार के खिलाफ हमले के इंतजार में बैठे विपक्ष राजीव कुमार की ये बाते ले उड़ी। और देखते ही देखेते विकास की आंधी चलाने वाली मोदी सरकार सवालों के बवंडर में घिर गई। हालात ऐसे हो चले की राजीव कुमार को अपनी बातों से पलटी मारनी पड़ी। मामले पर बढ़ते घमासान के बीच कुमार के हवाले से दूसरी खबर आई कि...

देश में आर्थिक मंदी से पैनिक जैसी कोई स्थिति नहीं है। देश की अर्थव्यवस्था पटरी पर है

विरोधियों को स्वीकार करना चाहिए कि हालात बेहतर

मौजूदा हालात से घबराने की कोई जरूरत नहीं

लेकिन अब हालात इतने खराब हो चुके हैं कि अर्थव्यवस्था पर खुद वित्त मंत्री को मीडिया में हाजिरी लगानी पड़ती है।

आपको बता दें कि अर्थव्यवस्था पर ये घमासान ऐसे समय में मचा है जब हाल ही में मुख्य आर्थिक सलाहकार के. सुब्रमण्यम ने प्राइवेट सेक्‍टर की कंपनियों को माइंडसेट बदलने की नसीहत दी थी। सुब्रमण्यम ने प्राइवेट कंपनियों से कहा था की एक बालिग व्यक्ति लगातार अपने पिता से मदद नहीं मांग सकता, आपको अपनी सोच को बदलनी होगी। आप यह सोच नहीं रख सकते कि मुनाफा हुआ तो खुद लपक लूं और घाटा हुआ  तो सब पर उसका बोझ  डाल दूं।

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