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नतीजों से एक दिन पहले, दफ्तर में चुनावी चौकीदारों का बैठक और बाहर हुड़दंग !

नई दिल्ली: सियासी महासमर के समापन के बाद देश की जनता 23 मई का इंतजार कर रही है। ये वो दिन है जब देश का चुनावी चौकीदार चुनाव आयोग आम चुनाव 2019 के नतीजे घोषित करेगा। लेकिन इससे पहले एग्जिट पोल के नतीजों ने देश की राजनीति को एक नई दिशा दे दी है। एग्जिट पोल में बीजेपी की नेतृत्व वाली एनडीए को मिल रही संभावित जीत से गदगद बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने जीत का जश्म भी शुरू कर दिया है। बीजेपी कार्यकर्ताओं ने जश्न की तैयारी पुरी कर ली है। वहीं दूसरी तरफ विपक्षी नेताओं की बेचौनी सारी हदे पार कर रही है।

एनडीए की संभावित जीत से सदमे में पहुंती विपक्षी पार्टियां एग्जिट पोल को फिक्श बता रही हैं। विपक्ष का आरोप है कि  एग्जिट पोल में एनडीए की जीत फिक्श कराई गई है, ताकि ईवीएम में छेड़छाड़ किया जा सके। ईवीएम की गुणवत्ता पर सवाल खड़े करते हुए 22 विपक्षी पार्टियों के नेताओं ने मंगलवार को चुनाव आयोग से मुलाकात कर कई आरोप लगाए और सुझाव भी दिए। हालांकि चुनाव आयोग ने विपक्ष के आरोपों को खारिज किया, लेकिन सुझावों पर मंथन के लिए बुधवार को दिल्ली दफ्तर में चुनाव आयोग की बैठक चल रही है और बाहर हुड़दंग मचा है।

बुधवार को जो नजारा चुनाव आयोग के दफ्तर के बाहर दिखा, वो ऐतिहासिक है! वो काफी हैरान करता है! दरअसल, चुनावी परिणाम घोषित करने से एक दिन पहले चुनावी चौकीदारों की बैठक चल रही है और बाहर विपक्षी दलों के कार्यकर्ता चुनाव आयोग के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। चुनाव आयोग पर सवाल खड़े करते हुए प्रदर्शनकारी पोस्टर बैनर के साथ नारेबाजी में जुटे हैं।

ईवीएम के साथ छेड़छाड़ किए जाने के मामले को लेकर पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त ओ पी रावत ने भी कहा कि ईवीएम में छेड़छाड़ या बदलना संभव ही नहीं है। उन्होंने कहा कि नई ईवीएम में थोडी भी छेड़छाड़ करने से मशीन फैक्टी मोड में चली जाती है। इसलिए छेड़छाड़ संभव नहीं है। लेकिन विपक्ष का दावा है कि अगर एग्जिट पोल के नतीजे वास्तविक साबित होते हैं तो ऐसा ईवीएम से छेड़छाड़ के कारण ही हुआ है।

विपक्ष की मांग है कि चुनाव आयोग 50 फीसदी वीवीपैट पर्चियों का मिलान करे। ऐसी मांग विपक्ष ने देश की सबसे बड़ी अदालत सुप्रीम कोर्ट से भी की थी, लेकिन कोर्ट ने विपक्ष की मांग खारिज कर दी। जिसके बाद कोर्ट में 100 प्रतिशत यानी सभी वीवीपैट पर्चियों की मिलान की मांग को लेकर एक याचिका भी दायर की गई, लेकिन कोर्ट ने इस याचिका को बकवास करार देते हुए खारिज कर दिया और कहा कि जनता को अपना नेता चुनने दीजिए, हम इसके आड़े नही आ सकते। लेकिन इसके बाद भी विपक्ष का रवैया नरम नहीं दिख रहा है।

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