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राष्ट्रपति मुखर्जी ने नहीं किया था मतदान, फिर कोविंद ने क्यों किया?

नई दिल्ली: दुनिया के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश हिंदुस्तान में इन दिनों ‘लोकपर्व’ चल रहा है। रविवार को छठे चरण में सात राज्यो की 59 सीटों के लिए वोटिंग कराई जा रही हैं। लोकतंत्र के इस महापर्व में आम जनता से लेकर सियासी धुरंधर तक, सभी मताधिकार का इस्तेमाल करने मतदान केंद्र तक पहुंच रहे हैं। इस कड़ी में भारत के प्रथम नागरिक राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने भी अपनी पत्नी के साथ मतदान किया है।

मतदान करने के सथ ही राष्ट्रपति कोविंद देश के उन चुनिंदा राष्ट्रपतियों के क्रम में शुमार हो चुके हैं, जो पद पर रहते हुए मतदान प्रक्रिया का हिस्सा बने। राष्ट्रपति कोविंद के लिए राष्ट्रपति भवन में ही विशेष पोलिंग केंद्र बनाया गया था, जहां उन्होंने अपनी पत्नी के साथ मतदान किया है। हालांकि कोविंद ऐसे पहले महामहिम नहीं हैं जो महापर्व का हिस्सा बने हैं।

पहली बार साल 1998 में के आर नारायणन देश के पहले ऐसे राष्ट्रपति थे जिन्होंने पद पर रहते हुए मताधिकार का इस्तेमाल किया था। उन्होंने आम नागरिक की तरह मतदान केंद्र के बाहर कतार में लगकर अपनी बारी का इंतजार किया और वक्त आने पर मतदान किया था। वहीं डॉ एपीजे अब्दुल कलाम और प्रतिभा पाटिल भी देश के उन राष्ट्रपति की सूची में सामिल हैं जिन्होंने पद पर रहते हुए मतदान किया है।

नारायणन से पहले देश के किसी भी राष्ट्रपति ने मतदान नहीं किया था। वहीं कोविंद से पहले साल 2012 में राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने भी मतदान न करते हुए पुन: उसी प्रक्रिया को स्थापित किया जिसमें राष्ट्रपति मतदान नहीं करते थे। उन्होंने कहा कि देश के राष्ट्रपति के मतदान नहीं करने की जो परंपरा रही है वह उसे पुन: शुरू करना चाहते हैं। इसलिए उन्होंने मतदान नहीं किया।

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