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अचानक 150 बच्चों के मौत के बाद जागी मां की ममता, पिता अब भी खामोश

नोएडा : आखिरकार चमकी बुखार से मरने वाले बच्चों का मामला अब लोकसभा संसद में भी गूंजा। लेकिन वह तब जब पश्चिम बंगाल से कांग्रेस सांसद अधीर रंजन चौधरी ने उठाया। जिस पर स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन तो चुप रहें लेकिन महिला-बाल विकास कल्याण मंत्री स्मृति ईरानी का अचानक ममत्व जाग उठा, वो भी तकरीबन 19 दिनों के बाद, जब 150 मासूम बच्चे काल के गाल में समा गये।   

स्मृति ईरानी ने कहा कि, “मां हूं इसलिए जानती हूं कि बच्चों की मौत कितनी दुखद है”। अब ये समझ से परे हैं कि आखिर ईरानी का दिल इतने दिनों बाद क्यों पसीज रहा है। बता दें कि चमकी को लेकर पूरे बिहार में त्राही-त्राही की स्थिति उत्पन्न हो गई थी। बच्चों का टूटता दम एवं मां के आंख के आंसू लगातार बह रहें थें लेकिन कोई भी नेता उन मांओं के आंखों के आंसू पोछने नहीं आये।   

जब यह मामला संसद में आया तो स्मृति का दिल कलवित हो उठा। अब इस दिल का अचानक कलवित होना क्या हैं वो तो स्मृति बताएंगी। लेकिन वहीं बिहार की संवेदनहीन सरकार के मुखिया नीतीश कुमार बच्चों की मौत पर अब तक मौन साधे हुए हैं। 14 सालों से बिहार में बहार है का नारा लगा रहे नीतीश कुमार का बिहार मासूमों का श्मशान बना है। करीब 10 सालों से हर साल चमकी बुखार बिहार पर ऐसे ही कहर बरपाता रहा है। लेकिन राज्य की सरकार अब तक बीमारी की पहचान तक नहीं कर सकी है। यहां गलती सिर्फ और सिर्फ नीतीश कुमार की नहीं बल्कि नीतीश के साथ सत्ता की मलाई चाट रही बीजेपी भी उतनी ही जिम्मेदारा है। क्योंकि अगर 9 महीने जीतन राम मांझी का कार्यकाल और 9 महीने नीतीश और महागठबंधन का कार्यकाल अलग कर दिया जाए तो बचे हुए समय में बिहार पर नीतीश और बीजेपी का ही शासन रहा है।

बता दें कि चमकी अब तक 150 से अधिक बच्चों को निगल चुका है, जबकि 300 से अधिक बच्चे ज़िदगी औऱ मौत की लड़ाई लड़ रहें है। इस प्रकोप पर अब तक पीएम मोदी भी चुप हैं क्योंकि उन्हें बच्चों की अपेक्षा वर्ल्ड कप में दिलचस्पी ज्यादा है।

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