Breaking News
  • भारत से निपटने को तैयार किए कम दूरी के परमाणु हथियार- पाकिस्तानी पीएम
  • चेन्नई में केजरीवाल-कमल हासन की मुलाकात- नई पार्टी पर हो सकती है चर्चा
  • राजस्थान: अलवर में रामानुजाचार्य संम्प्रादाय से जुड़े गुरु पर लगा रेप का आरोप
  • आज 21 सितंबर से नवरात्र की शुरुआत

शिकागो में विवेकानंद के संबोधन की 125वीं वर्षगांठ पर पीएम मोदी का लाजवाब भाषण

नई दिल्ली: देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज सोमवार को शिकागो में स्वामी विवेकानंद के ऐतिहासिक भाषण की 125वीं वर्षगांठ और दीनदयाल उपाध्याय के जन्मशती समारोह के तहत छात्र सम्मेलन को संबोधित कर रहे हैं। यूजीसी के निर्देश पर पीएम के इस संबोधन का प्रसारण देश भर में किया जा रहा है। इस आयोजन का थीम यानी विषय है ‘यंग इडिया, न्यू इंडिया’। इस अवर पर पीएम राजधानी दिल्ली में विज्ञान भवन में छात्रों के एक सम्मेलन को संबोधित कर रहे हैं।

सम्मेलन को संबोधित करते हुए पीएम ने कहा कि कॉलेज- युनिवर्सिटी के चुनाव में छात्र नेता कहते हैं कि हम ये करेंगे, वो करेंगे, लेकिन क्या उन्होंने कभी ऐसा कहा है कि हम कैंपस साफ करेंगे। उन्होंने कहा कि कॉलेज में रोज डे बनता है मैंने कभी विरोध नहीं किया, लेकिन केरल पंजाब दिवस मनाए और पंजाब केरल दिवस मनाए क्योंकि विविधता ही हमारे देश की पहचान है।

“नीतीश कुमार गर्भवती महिला और सुशील मोदी आशा कार्यकर्ता हैं”

पीएम मोदी ने साफ सफाई को लेकर कहा कि आज हम लोग सफाई करें या न करे, लेकिन हमें गंदगी फैलाने का कोई हक नहीं है। उन्होंने कहा कि एक बार मैंने कहा था कि पहले शौचालय, फिर देवालय, और आज कई बेटियां हैं जो कहती हैं कि शौचालय नहीं तो शादी नहीं करेंगे। तो वहीं वंदेमातरम को लेकर पीएम ने कहा कि वंदे मातरम सुनकर रोंगटे खड़े हो जाते हैं, मैं पूछना चाहता हूं क्या हमें वंदे मातरम कहने का हक नहीं है? उन्होंने कहा कि लोग पान खाकर भारत मां पर पिचकारी मारते हैं और फिर वंदे मातरम बोलते हैं। आज सफाई का काम करने वालों को ही वंदे मातरम बोलने का हक है।

पीएम ने कहा- सुनिए पूरा भाषण!

स्वामी विवेकानंद ने अपने अल्प जीवन में ही विश्व में अपनी छाप छोड़ी

विश्व को पता ही नहीं था कि Ladies and Gentleman के अलावा भी कुछ हो सकता है

जब उन्होंने brothers  and sisters कहा तो तालियां बजती रही

तब दुनिया को भारत की ताकत का एहसास हुआ

जिस वक्त पूजा-पाठ का महत्व ज्यादा था, उस समय 30 साल के नौजवान ने कहा

मंदिर में बैठने से भगवान नहीं मिलेंगे, जन-सेवा से मिलेंगे

उस समय यह बहुत बड़ी बात थी

उन्होंने दुनिया को आध्यात्म से परिचित कराया

वह गुरू खोजने नहीं निकले थे, सत्य की तलाश में थे

गर्व होता है जब किसी से कहता हूं कि मेरे देश के रवींद्र नाथ टैगोर ने श्रीलंका और बांग्लादेश का राष्ट्रगान बनाया

गुलामी के दौर में भी विवेकानंद आत्मविश्वास से भरे थे

उनके संबोधन से पहले भारत की पहचान सांपों के देश के रूप में थी

उन्होंने जमशेदजी टाटा से कहा था कि भारत में उद्योग लगाओ

टाटा ने माना कि स्वामी जी से उन्हें प्रेरणा मिली

 

loading...