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निजामुद्दीन मरकज में जयपुर से लापता पीयूष मिला, शक के दायरे में तब्लीगी जमात


रिपोर्ट: सौरभ सिंह 

जयपुर: भारत में कोरोना के दस्तक के साथ ही निजामुद्दीन मरकज और मरकज के मुखिया मौलाना साद सबसे ज्यादा सुर्खियों में र‌हे। दिल्ली स्थित निजामुद्दीन मरकज तबलीगी जमात इस्लामिक धार्मिक आयोजन केंद्र में कोरोना वायरस संक्रमण का सबसे बड़ा मामला सामने आने के बाद देश की राजधानी सहित पूरे देश में हड़कंप मच गया था। निजामुद्दीन मरकज और और तबलीगी जमात के मौलाना साद इसलिए सबसे ज्यादा सुर्खियों में रही क्योंकि लॉकडाउन के बावजूद यहां 2000 से ज्यादा लोगों का इकट्ठा होना जमात की सामाजिक जिम्मेदारी पर सवाल खड़े कर रहा है। दिल्ली पुलिस ने तो तबलीगी जमात के मौलाना साद के खिलाफ केस भी दर्ज किया था। अब एक बार फिर निजामुद्दीन मरकज और मरकज के मुखिया मौलाना साद चर्चा में है और चर्चा का कारण है जयपुर का पीयूष सिंह

बता दे जयपुर के रहने वाले पीयूष सिंह नामक एक शख्स 20 मार्च को लापता हो गया था। उसे हाल ही में दिल्ली के निजामुद्दीन मरकज में पाया गया, जहां तब्लीगी जमात की सूची में उसका नाम मोहम्मद अली के नाम से पंजीकृत था। अधिकारियों ने कहा कि उसके लापता होने के सात दिन बाद शख्स के पिता अनूप सिंह ने 27 मार्च को जयपुर के सदर थाना में एक शिकायत दर्ज कराई। जयपुर पुलिस की एक टीम द्वारा इस बुधवार शख्स को मरकज से वापस लाया गया। सदर थाना के एसएचओ राजेंद्र सिंह शेखावत ने इसकी पुष्टि की।

पीयूष का आधार नंबर वही है, जो तब्लीगी जमात के सदस्यों की सूची में अली का है। सूची में अली का पता मेरठ दिखा रहा है। 19 अप्रैल को अली उर्फ पीयूष को क्वारंटीन में रहने की सलाह दी गई थी। वह दिल्ली के सुल्तानपुरी पुलिस स्टेशन में था। अधिकारियों ने बताया कि उससे जांच के नमूने तीन बार लिए गए और हर बार परिणाम नेगेटिव आया। पुलिस की एक टीम दिल्ली गई और बुधवार को उसे वापस लेकर आई। एसएसओ शेखावत ने आईएएनएस को बताया कि वह वापस नहीं आना चाह रहा था, वह वही रहना चाहता था और वह अपने पिता के साथ नियमित तौर पर संपर्क में भी था। मरकज में रहने के दौरान उसका मोबाइल भी स्विच्ड ऑन था। उन्होंने आगे कहा कि वह अपनी इच्छा से मरकज गया था। जब आईएएनएस द्वारा पूछा गया कि उसका नाम अली क्यों रखा गया था? इस पर एसएचओ ने बताया, "उसने शायद खुद ही इस नाम से अपना पंजीकरण कराया होगा। अगर वह यह चाहता कि उसे रॉबिन हुड के नाम से जाना जाए, तो अधिकारी उसका नाम रॉबिन हुड ही लिखते। वह स्वेच्छा से वहां रह रहा था।"

हालांकि उसके पिता का कुछ और ही कहना है। पीयूष के पिता ने कहा, "मुझे 10 दिन पहले पता चला कि मेरा बेटा मरकज में है। इसके बाद पुलिस ने प्रयास किया और उसे वापस लाने में मदद की।" उन्होंने आगे कहा, "दिल्ली से वापस आने के बाद मेरे बेटे की मानसिक स्थिति स्थिर नहीं है और वह किसी से बात भी नहीं करना चाहता है।" उन्होंने आगे बताया, "पीयूष ने बीसीए की पढ़ाई की है और एमसीए की तैयारी कर रहा है। अभी उसे आए बस दो ही दिन हुए हैं, कुछ दिनों बाद हम उससे पूछेंगे कि वह मरकज कैसे पहुंचा।" उन्होंने आगे यह भी कहा, "समय अच्छा नहीं चल रहा है। हमें नहीं पता कि वह किसके संपर्क में था और किसकी मदद से मरकज पहुंचा।" अपने द्वारा दर्ज की गई शिकायत में पीयूष के पिता ने यह भी कहा था कि पिछले कुछ महीनों से उनका बेटा नमाज पढ़ रहा है और इस्लाम की बातें भी करता है। पिता ने यह भी बताया था कि घर पर वह चिंतित रहने लगा था। पीयूष ने साइबर सिक्योरिटी कोर्स की भी पढ़ाई की है और इस काम में वह निपुण भी है।

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

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