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क्या 20 साल बाद इस देश का हिस्सा होगा पाकिस्तान

NEW DELHI:- एक पुरानी कहावत है कि अगर पड़ोस के घर में आग लगी हो तो उसकी तपिश से आप अपने को नहीं बचा सकते हैं। आप चाहें या न चाहें उस तपिश से बचने के लिए पडो़सी के घर लगी आग को बुझाना ही होगा। सीपीइसी के जरिेए जिस तरह से चीन अपनी आर्थिक हितों को साधने की कोशिश कर रहा है वो सिर्फ व्यापार तक केंद्रित नहीं है, बल्कि वो पाकिस्तान के जरिए भारत को घेरने में जुटा है। वन बेल्ट, वन रोड समिट के खत्म होने के बाद कुछ ऐसे दस्तावेज सामने आए हैं, जिससे साफ होता है कि पाकिस्तान को चीन अपना उपनिवेश बनाना चाहता है।

पाकिस्तान के लिए बर्बादी का सौदा है सीपीइसी

पाकिस्तान के चर्चित अखबार डॉन ने लिखा है सीपीइसी का मकसद केवल व्यापार को संचालित या नियंत्रित नहीं करना है बल्कि पाकिस्तान की संस्कृति को प्रभावित करने की कोशिश है। पाकिस्तान सरकार आर्थिक गलियारे के फायदे बताने में जुटी है। लेकिन गिल्गित और बाल्टिस्तान के लोगों का कहना है कि उनके अधिकारों पर सुनियोजित ढंग से हमला किया जा रहा है।

सीपीइसी पर चीन की रणनीति

सीपीइसी चीन के जिनजियांग प्रांत से शुरू होकर बलूचिस्तान के ग्वादर पोर्ट पर खत्म हो रहा है। पाकिस्तान इस आर्थिक गलियारे के दोनों तरफ हजारों एकड़ जमीन चीन को लीज पर देने जा रहा है। पेशावर से लेकर कराची तक निगरानी तंत्र का विकास किया जाएगा। जो 24 घंटे सीपीइसी की निगरानी रखेगा। चीनी संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए नेशनल फाइबर ऑप्टिक बैकबोन का इस्तेमाल किया जाएगा।

पाक की संस्कृति का होगा नुकसान

पाकिस्तान के जानकारों का कहना है कि सीपीइसी के जरिए चीन पाकिस्तान की संस्कृति को भी प्रभावित करेगा ये शायद पहला ऐसा सौदा होगा जो पाकिस्तान के इतिहास में कभी हुआ ही नहीं हो। रिपोर्ट में इस बात का भी जिक्र है कि पाकिस्तान के सूती वस्त्र उद्योग को नुकसान पहुंचाने की एक बड़ी योजना है। चीन की सोच है कि उसे पाकिस्तान से कच्चा माल मिल सके जो जिनजियांग की सूती वस्त्र उद्योग की जरूरतों को पूरी कर सके।जमीन पर चीन अगर ये सब करने में कामयाब रहता है तो पाकिस्तान चीनी उत्पादों का एक बड़ा बाजार बन जाएगा।

इसके अलावा सीमेंट और दूसरे उद्योगों पर पाकिस्तान चीन पर निर्भर रहेगा। चीन अपनी जरूरतों के मुताबिक पाकिस्तान की बांह मरोड़ता रहेगा।सीपीइसी के जरिए पाकिस्तान की सुरक्षा खतरे में पड़ जाएगी। इसके अलावा आने वाले 6 सालों में पाकिस्तान में मुद्रा स्फीति की दर 11.6 रहेगी।

वन बेल्ट वन रोड

आर्थिक मंदी से उबरने के साथ साथ अपनी अर्थव्यवस्था में जान फूंकने के लिए चीन ने 'वन बेल्ट, वन रोड' परियोजना को पेश किया है। एशिया,यूरोप और अफ्रीका को सड़क मार्ग, रेलमार्ग, गैस पाइप लाइन और बंदरगाह से जोड़ने के लिए चीन सिल्क रोड इकोनॉमिक बेल्ट और मैरीटाइम सिल्क रोड परियोजना पर तेजी से काम कर रहा है। इसके तहत छह गलियारे बनाए जाने की योजना है। इसमें से कई गलियारों पर काम भी शुरू हो चुका है।

इसमें पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) से गुजरने वाला चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा भी शामिल है, जिसका भारत कड़ा विरोध कर रहा है। भारत साफ कर चुका है कि सीपीइसी के जरिए उसकी संप्रभुता के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। कुछ दिन पहले ही चीन ने भारत को शामिल करने के लिए चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे का नाम बदलने पर भी राजी हो गया था, लेकिन बाद में वो अपने बयान से मुकर गया।

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