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तीन तलाक बिल को ओवैसी ने बताया आर्टिकल विरोधी, रविशंकर ने कहा सम्मान...

नोएडा : मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल की शुरूआत के साथ ही एक बार फिर तीन तलाक का मुद्दा गरमाने लगा है। शुक्रवार को लोकसभा में हंगामे के बीच कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने बिल को सदन में पेश करते हुए मुस्लिम महिलाओं के हितकारी बताया तो वहीं कांग्रेस समेत तमाम विपक्षी दलों ने इस बिल को असंवैधानिक करार देते हुए इसका विरोध किया।

लोकसभा में जारी बवाल के बीच तीन तलाक बिल को पेश किया गय। कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने बिल को सदन में सबके समक्ष पेश करते हुए कहा कि, यह मुस्लिम महिलाओं के हितों की रक्षा के लिए है। प्रसाद ने बिल की जरूरत को बताते हुए कहा, '70 साल बाद...क्या संसद को नहीं सोचना चाहिए, कि 3 तलाक से पीड़ित महिलाएं सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद भी न्याय की गुहार लगा रही हैं, तो क्या उन्हें न्याय नहीं मिलना चाहिए। महिलाओं के हक के लिए हमारी सरकार महिलाओं के सम्मान और गरिमा के साथ है। वहीं तिरुवनंतपुरम से कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने इस बिल का यह कहकर विरोध किया कि बिल समुदाय के आधार पर भेदभाव करता है। थरूर के साथ ही AIMIM सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने तीन तलाक बिल संविधान के आर्टिकल 14 और 15 का उल्लंघन बताकर विरोध किया।

विपक्ष के हंगामें के बाद बिल को लेकर वोटिंग हुई, जिसमें बिल के पक्ष में 186 और विपक्ष में 74 वोट पड़ें। वोटिंग के बाद बिल को औपचारिक तौर पर पेश मान लिया गया।

आपको बता दें कि सरकार के पिछले कार्यकाल में भी तीन तलाक पर बिल को लाया गया था जो लोकसभा से पारित हो गया था लेकिन 16वीं लोकसभा लोकसभा का कार्यकाल समाप्त होने के कारण और राज्यसभा में लंबित रहने के कारण यह निष्प्रभावी हो गया।

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