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अखबार की ‘गलत’ रिपोर्ट के सहारे मोदी पर बरसे राहुल, रक्षा मंत्री ने उड़ाई धज्जियां

नई दिल्ली: फ्रांस के साथ लड़ाकू विमान राफेल डील को लेकर देश में पिछले काफी समय से राजनीतिक जारी है। इस बीच हाल ही में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने एक मीडिया रिपोर्ट का हवाला देते हुए इस आरोप लगाया कि इस डील में प्रधानमंत्री कार्यालय यानी पीएमओ का हस्तक्षेप है।

एक अंग्रेजी अखबार में छपी रिपोर्ट के आधार पर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने प्रेस कांफ्रेंस करके राफेल सौदे में प्रधानमंत्री कार्यालय के हस्तक्षेप का आरोप लगाया है। लेकिन रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण और रफेल सौदे की वार्ता के समय रक्षा सचिव रहे जी मोहन कुमार ने भी अखबार और राहुल गांधी के आरोपों का खंडन किया है।

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विपक्ष के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा है कि विपक्ष बहुराष्ट्रीय कंपनियों और निहित स्वार्थ से जुड़े तत्वों के हाथों में खेल रहा है। मामले पर संसद में जवाब देते हुए रक्षा में कहा कि विपक्ष गड़े मुर्दे उखाड़ने का का प्रयास कर रहा है।

बता दें कि, राहुल गांधी ने अखबार की हवाले से रफेल सौदे में पीएमओ के हस्तक्षेप का आरोप लगाने के साथ ही रक्षा मंत्रालय के एक नोटस का हवाला दिया था। लेकिन इन आरोपों को खारिज करते हुए रक्षा मंत्री सीतारमण ने कहा कि पीएमओ की ओर से विषयों के बारे में समय-समय पर जानकारी लेना हस्तक्षेप नहीं कहा जा सकता है। साथ ही उन्होंने यूपीए सरकार के समय सोनिया गांधी की अध्यक्षता वाली राष्ट्रीय सलाहकार परिषद के दखलनदाजी को भी याद दिलाया।

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वहीं मीडिया की रिपोर्ट को लेकर रक्षा मंत्री ने कहा कि इसमें एथिक्स का पालन करना चाहिए था। उन्होंने कहा  कि अगर अखबार सच को सामने लाना चाहता तो उसे तब और आज के रक्षा मंत्री की बात को भी इसमें शामिल करना चाहिए था। उन्होंने कहा कि, अखबार ने पूरी सच्चाई सामने नहीं रखी है।

गौरतलब है कि अखबार ने जिस नोट का उल्लेख किया है उसी नोटस में नीचे ततकालीन रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर का भी नोट्स है जिसमें उन्होंने मिनिस्ट्री के नोट को 'ओवर रिएक्शन' करार दिया था। रक्षा मंत्री ने नोट्स में लिखा था कि, ऐसा लगता है कि शिखर बैठक के नतीजों के मुताबिक ही प्रधानमंत्री कार्यालय और फ्रांस के राष्ट्रपति का ऑफिस सीधे इस मामले में निगरानी रख रहे हैं।

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