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प्राकृतिक आतंक के आगे बौनी साबित हो रही सभी सरकारें!

नई दिल्ली/कोलकाता: बड़े बड़े दावे और वादे करने वाली सरकारें हो हो या बुलेट ट्रेन से लेकर अंतरिक्ष पर पहुँच बनाए वाले संसाधन। इनता सब कुछ होने के बाद भी आज भारत प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के मामले में सिफर है। यह आपदाएं पूर्व निर्धारित होती हैं। हर वर्ष इनमें सैकड़ों लोग अपनी जान गँवा देते हैं, इनता सब कुछ होने के बाद भी सरकारें हाथ पर हाथ धरे बैठी रहती हैं।

देशभर में लगभर सभी सरकारों के लिए प्राकृतिक आपदा बाढ़ मुसीबत बनी हुई है। यह प्राक्रतिक आपदा कोई नई नहीं है। यह हर साल का रूटीन प्रकोप है। बाढ़ जैसी स्थित हर वर्ष देश के सामने विकराल रूप लेकर आ खड़ी होती है और नजाने कितने निर्दोष लोगों की जान ले लेती है। हर वर्ष का तांडव होने के बाद भी बड़े बड़े दावे करने वाली भारत की सरकारें कुछ न कर पाती हैं। अंतरीक्ष सहित मंगल पर वस्ती बसाने की सोचने वाले लोग धरती पर आई आपदा से निपटने की कोई तकनीक विकसित नहीं कर पा रहे हैं।

भारी बारिश के बाद बाढ़ जैसी आपदा आना लाजमी है और यह हर वर्ष आती है, लाखों लोगों का आशियाना उजड़ता है, और फिर सरकारें हजारों करोड़ खर्च करके पुनः रहने की व्यवस्था करवाती हैं। अभी हाल ही में गुजरात, असम, राजस्थान के बाद अब बाढ़ का कहर बंगाल में देखने को मिल रहा है।

यहाँ पिछले 24 घंटे में मृतकों की संख्या बढ़कर 39 हो गई है, जिसमें से पांच मौतें पिछले 24 घंटों के दौरान हुई हैं। राज्य सचिवालय नबन्ना में एक अधिकारी ने बताया कि पिछले 24 घंटों के दौरान पांच और मौतें सामने आई हैं, और इसके साथ ही 21 जुलाई से अब तक मृतकों की संख्या 39 है।

अधिकारी ने बताया कि 19 लोगों की मौत पानी में डूबने के कारण हुई है, पांच दीवार गिरने से, तीन बिजली के संपर्क में आने से, पांच आकाशीय बिजली से और दो मौतें नौका पलटने के कारण हुई हैं। कई लोगों की जान विषैले सांपों के काटने से भी हुईं हैं। बाढ़ के कारण लाखों लोग बेघर हो गये हैं, इन्सानों के साथ साथ इसका असर मवेशियों पर भी पड़ रहा है।

पालतू जानवर भी लगातार मारे जा रहे हैं। फिलहाल केंद्र सरकार ने कई जगहों के लिए राहत पॅकेज की व्यवस्था कर दी है, गुजरात, राजस्थान और असम में बाढ़ के कारण सैकड़ों लोग मारे जा चुके हैं, ऐसे में सरकार ने उनके जख्मों पर मरहम तो लगा दिया है लेकिन क्या कोई ऐसी रणनीति भी बनायी गयी है, जिससे अगली साल इस बाढ़ में लोगों की जाना न जा सके, हालत बदतर होने से पहले ही उन्हें, सुरक्षित जगहों पर पहुंचाया जा सके। इस सवाल का जवाब अगली साल तलाशेंगे?  

 

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