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मोदी सरकार पार्ट 2: मिलिए PM मोदी और उनके 57 मंत्रियों से और जानिए सब का बैकग्राउंड

नई दिल्ली: लोकसभा चुनाव में एक तरफा जीत दर्ज करने के बाद गुरुवार को नरेंद्र मोदी ने दूसरी बार प्रधानमंत्री पद की शपथ ले ली है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को राष्ट्रपति भवन के खुले प्रांगण में आयोजित भव्य समारोह के दौरान राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने शपथ दिलाई। शपथ दिलाने के बाद राष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री से हाथ मिलाकर उन्हें शुभकामनाएं भी दी। दूसरी बार भारत के प्रधानमंत्री के तौर पर शपथ लेते हुए मोदी ने कहा, मैं नरेंद्र दामोदर दास मोदी, ईश्वर की शपथ लेता हूं कि मैं विधि द्वारा स्थापित भारत के संविधान के प्रति सच्ची श्रद्धा और निष्ठा रखूंगा।

पीएम मोदी के अलावा राजनाथ सिंह और बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह समेत अन्य सदस्यों को भी शपथ दिलाई जा रही है। शपथ ग्रहण समारोह में यूपीए चेयरपर्सन सोनिया गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के अलावा दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल समेत अन्य अलग-अलग कई दलों के नेता समेत बिम्सटेक समेत 14 देशों के राष्ट्राअध्यक्ष समेत करीब 6 हजार से अधिक लोगों शामिल रहे। जबकि कुछ विदेशी मेहमान अब भी कार्यक्रम स्थल पर पहुंच रहे।

मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल में मंत्री पद की शपथ लेने वाले अमित शाह पहली बार केंद्र सरकार में मंत्री बने हैं। शाह ने गुजरात के गांधीनगर सीट से प्रचंड जीत की है। मोदी और शाह के अलावा नितिन गडकरी ने भी मंत्री पद की शपथ ली है। वह दूसरी बार जीतकर संसद पहुंचे हैं। आरएसएस के करीबी माने जाने वाले गडकरी मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में सड़क परिवहन मंत्री रह चुके हैं। जबकि वह बीजेपी अध्यक्ष के तौर पर भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं।

इसके अलावा डी वी सदानंद गौड़ा को भी मंत्री पद की शपथ दिलाई गई है।

निर्मला सीतारमन को भी मंत्री पद की शपथ दिलाई गई है। वह राज्यसभा सदस्य है। वह पिछली सरकार में रक्षा मंत्री रह चुकी हैं।

रामविलास पासवान-  को मंत्री पद की शपथ दिलाई गई है। मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में खाद्य आपूर्ति मंत्री रहे पासवाल एलजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। वह फिलहाल किसी भी सदन के सदस्य नहीं हैं। उनके बेटे चिराग पासवा समेत लोजरा के 6 उम्मीदवार चुनाव जीतकर सांसद बने हैं। इससे पहले खबर थी पासवान ने खुद की जगह अपने बेटे के लिए मंत्रालय की मांग की थी, लेकिन उन्होंने अपना फैसला बदल दिया। जिसके बाद रामविलास पासवान को शपथ दिलाई गई है। ऐसे कयास लगाए जा रहे हैं कि उन्हें राज्यसभा के रास्ते संसद भेजा जा सकता है। पासवान इससे पहले केंद्रीय में रेल मंत्री और संचार मंत्री के तौर पर भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं।

नरेंद्र तोमर-  मध्य प्रदेश के मुरैना से चुनाव जीत कर मंत्री पद की शपथ ली है। साल 2014 में ग्वालियर सीट से जीतने वाले तोमर 1998 से 2008 तक विधायक भी रहे हैं। वह बीजेपी के कद्दवार नेता है।

रविशंकर प्रसाद- बिहार के पटना साहिब सीट से कांग्रेस उम्मीदवार शत्रुघ्न सिन्हा को हरा कर पहली बार सांसद चुने गए रविशंकर पिछली सरकार में कानून मंत्री थे। 2019 में पहली वार लोकसभा चुनाव लड़ने वाले प्रसाद पिछले काफी समय से राज्यसभा सदस्य रहे हैं।

थावरचंद गहलोत- बीजेपी के वरिष्टतम नेताओं में से एक गहलोत को भी मंत्री पद की शपथ दिलाई गई है। पांच बार लोकसभा सांसद चुने गए गहलोत बीजेपी के बड़े दलित चेहरा माने जाते हैं। 71 साल के थावरचंद मोदी सरकार कके उन मंत्रियों में शामिल हैं जो ग्रेजुएट हैं।

एस जयशंकर- भारत सरकार के विदेश सचिव रहे एस जयशंकर को भी मंत्री पद की शपथ दिलाई गई है।

रमेश पोखरियाल निशंक- उत्तराखंड के हरिद्वार से आने वाले पोखरियाल को भी मंत्री पद की शपथ दिलाई गई है। साल 2014 में लोकसभा चुनाव जीत कर पहली बार सांसद चुने गए  पोखरियाल उत्तराखंड के मुख्यमंत्री भी रह चुके हैं।

अर्जुन मुंडा- झारखंड के खूंटी से आने वाले मुंडा को भी मंत्री पद की शपथ दिलाई गई है। झारखंड के पूर्व सीएम मुंडा ने अपने राजनीतिक सफर का आरंङ JMM से किया था। साल 1995 में पहली बार विधायक चुने गए मुंडा अपनी पार्टी के लिए बड़े आदिवासी चेहरा माने जाते हैं।

हरसिमरत कौर बादल- पंजाब में nda की सहयोगी अकाली दल की नेता है। अकाली दल के प्रमुख सुखबीर बादल की पत्नी हरसिमरत कौर बठिंडा से चुनाव जीत कर सांसद बनी हैं।  मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में खाद्य प्रसंस्करण मंत्री रह चुकी कौर को पुन: मंत्री पद की शपथ दिलाई गई है।

स्मृति ईरानी- कांग्रेस के गढ अमेठी में कांग्रेस अध्यक्ष को पटकनी देकर सांसद बनी स्मृति ईरानी पिछली मोदी सरकार में केंद्रीय कपड़ा मंत्री थी। 15 साल से राजनीति में सक्रिय ईरानी दो बार राज्यसभा सांसद रह चुकी है। सियासत में आने से ईरानी टीवी अभिनेत्री थीं। वह संसद में पार्टी का पक्ष रखते हुए विरोधियों की बोलती बंद कराने के लिए खास तौर पर जानी जाती है।

डॉक्टर हर्षवर्धन- दिल्ली के चांदनी चौक से कांग्रेस के जे पी अग्रवाल को 2 लाख 28 हजार वोटों से हरा कर सासंद चुने गए हर्षवर्धन पिछली सरकार में पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री रह चुके हैं। वैश्य समाज से आने वाले हर्षवर्धन 1993 में पहली बार विधायक बने थे। 26 साल से राजनीति में मौजूद हर्षवर्धन दिल्ली में की राजनीति में अपनी खास पहचान रखते हैं।

प्रकाश जावडेकर- पिछली सरकार में शिक्षा मंत्री रहे प्रकाश जावडेकर को दूसरे कार्यकाल में भी मंत्री पद की शपथ दिलाई गई है। 80 के दशक से ही बीजेपी से जुड़े रहने वले जावडेकर पार्टी के दिग्गज नेताओं में सुमार किए जाते हैं, जो फिलहाल राज्यसभा सासंद हैं।

पीयूष गोयल- राजनीति में आने से पहले इन्वेस्टमेंट बैंकर रहे गोयल महाराष्ट्र से राज्यसभा सांसद हैं। 34 साल से राजनीति कर रहे गोयल मोदी की पिछली सरकार में रेल मंत्री थे। इस बार भी उन्हें रेल मंत्रालय की कामान सौंपी जा सकती है।

धर्मेंद्र प्रधान- ओडिशा में बीजेपी के सबसे बड़े चेहरों में से एक प्रधान राज्यसभा सांसद हैं।मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में पेट्रोलियम मंत्री रहे प्रधान गरीब परिवारों तक LPG पहुंचाने के लिए काफी लोकप्रियता बटोर चुके हैं।

मुख्तार अब्बास नकवी- बीजेपी दिग्गज नेता व मुस्लिम चेहरा नकवी राज्यसभा सांसद है। मोदी सरकार पिछले कार्यकाल में अल्पसंख्यक मंत्री रहे नकवी रामपुर से सांसद रह चुके हैं।  इस बार भी उन्हें अल्पसंख्यक मंत्रालय का भार दिया जा सकता है।

प्रहलाद जोशी- कर्नाटक के धारवाड़ से आने वाले जोशी कर्नाटक बीजेपी अध्यक्ष रह चुके हैं। लोकसभा कार्यवाही संचालित कर चुके जोशी लगातार चौथी बार सासंद बने बने हैं। जिन्हें कैबिनेट मंत्री के तौर पर शपथ दिलाई गई है।

महेंद्र नाथ पांडे- उत्तर प्रदेश के चंदौली  से सांसद चुने गए पांडे यूपी बीजेपी अध्यक्ष हैं। सगठन में उनके योगदान को देखते हुए उन्हें कैबिनेट मंत्री के तौर पर शपथ दिलाई गई है। मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में भी मंत्री रह चुके  पांडे साल 1991 में पहली बार विधायक चुने गए थे।

अरविंद सावंत- महाराष्ट्र में एनडीए की सहयोगी शिवसेना के कोटे से मंत्री पद की शपथ लेने वाले सांवत दक्षिण मुम्बई से कांग्रेस के मिलिंद देवड़ा (प्रदेश अध्यक्ष) को 1 लाख वोटों से हराकर सांसद चुने गए हैं। साल 2014 और 2019 में लगातार दूसरी सांसद चुने गए सावंत मोदी सरकार के पिछले कार्यकाल में भी मंत्री थे। सांसद बनने से पहले सावंत 1996 से 2010 तक एमएलसी रह चुके हैं।

गिरिराज सिंह- बीजेपी के फायर ब्रांड नेता सिंह  बिहार के बेगूसराय से सांसद चुने गए हैं। सिंह ने माकपा उम्मीदवार कन्हैया कुमार को 4 लाख 22 हजार वोटों से हराकर सांसद चुने गए हैं। साल 2014 में बिहार के नवादा से सांसद चुने गए सिंह 2002 से 2014 तक बिहार विधान परिषद के सदस्य रहे हैं। वहीं मोदी सरकार के पिछले कार्यकाल में भी मंत्री बने थे। हालंकि तह उनकी हैसियत राज्य मंत्री की थी, लेकिन अबकी बार उन्हें कैबिनेट मंत्री के तौर पर शपथ दिलाई गई है। 17 साल से सक्रिय राजनीति में दिख रहे सिंह 2008 से 2013 तक बिहार सरकार में मंत्री रहे हैं। जबकि मोदी सरकार के पिछले कार्यकाल में वह सूक्ष्मी,लघु और मध्यरम उद्यम मंत्रालय की कमान संभाल चुके हैं।

गजेंद्र शेखावत- राजस्थान के जोधपुर से आने वाले शेखावत ने अशोक गहलोत के गढ़ में ही उनके बेटे को हराया है। वह मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में कृषि राज्य मंत्री रहे थे।

संतोष गंगवार- उत्तर प्रदेश के बरेली से 8वीं बार सांसद चुने गए गंगवार को पहले प्रोटेम स्पिकर बनाए जाने की खबर आई थी। लेकिन उन्होंने इससे इनकार कर दिया। जिसके बाद उन्हें मंत्री पद की शपथ दिलाई गई है। वह 1989 से 2009 और 2014 से लगातार बीजेपी के सांसद रहे हैं। मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में श्रम व रोजगार मंत्रालय में राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) रहे गंगवार कुर्मी समाज से आते हैं और बीजेपी के कद्दावर नेता माने जाते हैं।

राव इंद्रजीत सिंह- हरियाणा के गुड़गांव से सांदद चुने गए हैं। उन्होंने कांग्रेस के अजय यादव को 3 लाख 86 हजार वोटों से हराया है। मोदी सरकार के पिछले कार्यकाल में प्लानिंग विभाग में राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) रहे थे। वह हरियाणा के पूर्व सीएम राव बीरेंद्र सिंह के बेटे हैं। राव इंद्रजीत सिंह 1977 में पहली बार रेवाड़ी जिले से विधायक चुने गए थे। 42 साल से राजनीति कर रहे सिंह कुल पांच बार सांसद और 4 बार विधायक चुने गए हैं।

श्रीपद नाइक- उत्तर गोवा से कांग्रेस प्रत्याशी को 80247 वोटों से हरा कर लगातार 5वीं बार सांसद चुने गए नाइक पहली बार 1999 से सांसद चुने गए थे। वह पिछली मोदी सरकार में आयुष मंत्रालय में राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार रहे।

जीतेंद्र सिंह- जम्मू-कश्मीर के उधमपुर से सांसद चुने गए सिंह ने कांग्रेस के विक्रमादित्य सिंह को 3.53 लाख वोटों से हराया है। विक्रमादित्य जम्मू कश्मीर के अंतिम राजा कर्ण सिंह के बेटे हैं। जिनकी सियासत पर अच्छी पकड़ मानी जाती है। लेकिन उन्हेंने मोदी की सुनानी में जीतेंद्र सिंह के खिलाफ मुंह की खानी पड़ी है।

किरन रिजिजू- अरुणाचल पश्चिम सीट से सांसद चुने गए रिजिजू पूर्व की सरकार में भी मंत्री थे। नार्थ इंडिया में पार्टी का बड़ा चेहरा माने वाले रिजिजू बीजेपी अध्यक्ष और पीएम मोदी के पसंदीदा नेताओं में से एक हैं।

प्रहलाद पटेल- दमोह से कांग्रेस उम्मीदवार प्रताप सिंह को 3 लाख 53 हजार वोटों से हराने वाले पटेल  लोधी समाज से आते हैं। करबी 30 साल से राजनीति में सक्रिय रहे पचेल पांच बार लोकसभा सांसद चुने गए हैं। पूर्व क्रेंद्रीय मंत्री उमा भारती के करीबी माने जाने वाले पटेल अटल सरकार के दौरान कोयला राज्यमंत्री रह चुके हैं।

आर के सिंह- बिहार के आरा से सांसद चुने गए सिंह मंत्री पद की शपथ ली है।

हरदीप पुरी-1974 बैच के विदेश सेवा के अधिकारी रहे पुरी को भी मंत्री पद की शपथ दिलाई गई है।

वीके सिंह- पूर्व सेना प्रमुख रहे जनरल सिंह पिछली सरकार में विदेश राज्यमंत्री थे। साल 2014 में पहली बार और 2019 में दूसरी बार गाजियाबाद लोकसभा सीट से सांसद चुने गए सिंह  देश के पहले प्रशिक्षित कमांडो हैं, जो आर्मी चीफ बने थे।

कृष्णपाल गुर्जर- हरियाणा के फरीदाबाद से सांसद चुने गए कृष्णपाल ने कांग्रेस के अवतार सिंह भड़ाना को 6 लाख 38 हजार वोचों से हराकर लगातार दूसरी बार सांसद चुने गए हैं। वहीं पिछली सरकार में सामाजिक न्याय और अधिकारिता राज्यमंत्री रह चुके हैं।

रावसाहेब दानवे- महाराष्ट्र के जालना से सांसद चुने गए दानवे राज्य में पार्टी के सबसे प्रमुख चेहरों में से माने जाते हैं। लगातार पांचवी बार सांसद चुने गए दानवे महाराष्ट्र बीजेपी के अध्यक्ष हैं।

जी किशन रेड्डी- तेलंगाना के सिकंदराबाद से सांसद चुने गए रेड्डी तेलंगाना बीजेपी के अध्यक्ष रह चुके हैं। तीन बार विधायक रह चुके रेड्डी पहली बार सांसद चुने गए हैं। और सौभाग्य से उन्हों मंत्री पद की शपथ भी दिलाई गई है।

पुरुषोत्तम रुपाला- 80 के दशक से बीजेपी से जुड़े हैं रुपाला राज्यसभा सदस्य है। वही पिछली सरकार में कृषि राज्य मंत्री थे।

रामदास आठवले- देश की राजनीति का बड़ा दलित चेहरा माने जाने वाले आठवले RPI के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। जो पिछली सरकार में भी मंत्री बने थे।

साध्वी निरंजन ज्योति- उत्तर प्रदेश के फतेहपुर से सांसद चुनी गई  साध्वी पिछड़ा समाज का चेहरा हैं। वह पिछली सरकार में भी खाद्य प्रसंस्करण राज्य मंत्री रह चुकी हैं।

बाबुल सुप्रियो- पश्चिम बंगाल के आसनसोल से दूसरी बार सांसद चुने गए बाबुल सुप्रियो सियासत में आने से पहले लोकप्रिय गायक थे। जिन्होंने टीएमसी के बड़ा चेहरा माने जाने वाली मुनमुन सेन को मात दिया है। 2014 में पहली बार आसनसोल सीट से बीजेपी को जीत दिलाने वाले बाबुल पिछली सरकार में भी मंत्री थे।

संजीव बालियान- उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर से सांसद चुने गए बालियान ने RLD के अजित सिंह को हराया है। वह पिछली सरकार में भी मंत्री थे।

संजय धोत्रे- महाराष्ट्र के अकोला से 2004 से लगातार सांसद चुने जा रहे . धोत्रे को कृषि क्षेत्र में शानदार योगदान के लिए कई पुरस्कारों से भी नवाजा जा चुका है।

अनुराग ठाकुर- हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर से सासंद चुने गए ठाकुर बीजेपी के युवा चेहरे के तौर पर जाने जाते हैं। साल 2008 से लगातार सांसद चुने जा रहे ठाकुरपूर्व सीएम प्रेम कुमार धूमल के बेटे हैं। इसके असाला वह बीसीसीआई के अध्यक्ष भी रह चुके हैं।

सुरेश अंगड़ी- कर्नाटक के बेलगाम में चुनाव जीतने वाले अंगड़ी पहली बार  2004 में सांसद चुने गए ते। लॉ ग्रेजुएट और बिजनेसमैन के तौर पर अपनी पहचान रखने वाले अंगड़ी बेलगाम में एजुकेशन सेंटर भी चलाते हैं। वह लगातार चार बार सांसद चुने गए हैं।

नित्यानंद राय- बिहार के उजियारपुर से सासंद चुने गए राय ने RLSP के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा को 2 लाख 77 हजार वोटों से हराया है। बिहार बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष रहे राय दो बार सासंद चुने गए हैं। 19 साल से सक्रिय राजनीति से जुड़े रहने वाले राय तीन बार विधायक चभी रह चुके हैं।

रतन लाल कटारिया- हरियाणा के अंबाला से सासंद चुनाव जीतने वाले कटारिया 1999 में पहली बार सांसद चुने गए थे। हरियाणा में बीजेपी का दलित चेहरा माने जाने वाले कटारिया  2014 और 2019 में लगातार सांसद चुने गए हैं।

वी मुरलीधरन- केरल के रहने वाले मुरलीधरन महाराष्ट्र से राज्यसभा सासंद हैं। ABVP से राजनीति सफर का आगाज करने वाले मुरलीधरन बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष भी रह चुके हैं।

रेणुका सिंह- छत्तीसगढ़ के सरगुजा से चुनाव जीतने वाली सिंह राज्य की चर्चित आदिवासी नेता हैं। रमन सिंह सरकार में मंत्री रह चुकी रेणुका बीजेपी महिला मोर्चा की उपाध्यक्ष हैं।

सोम प्रकाश- पंजाब के होशियारपुर से चुनाव जीतने वाले  प्रकाश आईएएस अधिकारी रह चुके हैं। जालंधर के डिप्टी कमिश्नर रह चुके हैं सोम पहली बार सासंद बने हैं। इससे पहले वह पंजाब के फगवाड़ा से विधायक भी रह चुके हैं।

रामेश्वर तेली- असम के डिब्रूगढ़ से चुनाव जीतने वाले रामेश्वर तेली पहली बार 2014 में सांसद चुने गए थे। इसके अलावा वह 2001 से 2011 तक विधायक रह चुके हैं।

प्रताप सारंगी- ओडिशा के बालासोर से आने वाले सारंगी को ‘ओडिशा का मोदी’ कहा जाता है। जमीन से जुड़े नेता के तौर पर अपनी पहचान रखने वाले सारंगी साइकिल से ही चलते हैं। वह पहली बार सांसद बने है और उन्होंने मंत्री पद से भी नवाजा गया है।

कैलाश चौधरी- राजस्थान के बाड़मे से आने वाले चौधरी पहली बार संसद पहुंचे हैं। वह साल 2013 से 2018 तक विधायक रहे हैं। जाट समुदाय का प्रतिनिधित्व करने वाले चौधरी ने जसवंत सिंह के बेटे को हराया है।

देबश्री चौधरी- पश्चिम बंगाल के राजगंज से आने वाले चौधरी पहली बार संसद पहुंचे हैं। बीजेपी की प्रदेश महासचिव रहे चौधरी इससे पहले वह 2014 लोकसभा चुनाव में भी उतरी थी। लेकिन तब उन्हों हार का मुंह देखना पड़ा था।

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