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बड़ी खबर: टूट रहा है सत्ता का सब्र, वोटिंग खत्म होने से पहले ही सरकार बनाने की कवायद में जुटा विपक्ष

नई दिल्ली: लोकसभा चुनाव 2019 के तहत अभी सातवें चरण का मतदान खत्म भी नहीं हुआ है कि सियासी दलों ने सत्ता की कवायद तेज कर दी है। राजनीतिक दलों का सब्र का बांध टूट रहा है। एक और सत्ताधारी भाजप को आशा ही नहीं बल्कि यकीन है कि जनता इसबार भी पूर्ण बहुमत के साथ देश की कमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों में सौंपने वाली है। वहीं दूसरी तरफ विपक्ष मोदी के सत्ता से हटाने का जुगाड़ तलाश रही है।

आपको बता दें कि 2019 चुनाव में सत्ताधारी बीजेपी के लिए सत्ता वापसी का इंतजार धारा के विपरित नाव खेने जैसा है, जबकि विपक्ष हर हाल में भाजपाई नाव को नदी में ही समाहित करना चाहती है। हालांकि इसका फैसला चुनावी नतीजे के बाद होगा। लेकिन इससे पहले एक ओर कांग्रेस वप पार्टी भाजपा विरोधी दलों की गोलबंदी करने में जुटी है तो वहीं दूसरी ओर थर्ड फ्रंट का नेतृत्व कर रहे आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबु नायडू ने भी विपक्षी दलों को एक छल की लाने की कवायद में जुटे हैं।

गौर हो कि कांग्रेस पार्टी ने भाजपा व एनडीए विरोधी दलों को साथ लाने की जिम्मेदारी राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को दी है वहीं बीते करीब 24 घंटे के अंदर में नायडू ने दो बार कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और एनसीपी अध्यक्ष शरद पवार से मुलाकात की है। दूसरी मुलाकात ऐसे समय में हुई जब नायडू ने शनिवार शाम लखनऊ में बीएसपी अध्यक्ष मायावती और समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव से मुलाकात की है। खबरों के अनुसार राहुल और शरद से मुलाकात के बाद नायडू यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी से मुलाकत करने वाले हैं।

सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के अनुसार मायावती और अखिलेश यादव की नायडू से सकारात्मक बातचीत हुई है। गैर बीजेपी की सरकार बनाने की कवायद करने वाले तीसरे मोर्चे का नेतृत्व कर रहे नायडू ने शुक्रवार को सीपीआई(एम) महासचिव सीताराम येचुरी और आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल से भी मुलाकात की है। जबकि इससे पहले उन्होंने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से भी बातचीत की है।

आपको बता दें कि नायडू के नेतृत्व में बने तीसरे मोर्चे में कांग्रेस को शामिल करने पर पहले मतभेद की इस्थिति रही है। हालांकि पिछले दिनों नायडू ने संकेत दिया था कि अगर कांग्रेस पार्टी पीएम पद की दावेदारी छोड़कर मोर्चे में आना चाहती तो स्वागत है। वहीं वरिष्ठ कांग्रेसी नेता गुलामनबी आजाद ने भी साफ किय है कि पीएम का फैसला सभी दल मिलकर करेंगे। जिसके बाद बीजेपी के खिलाफ तीसरा मोर्चा मजबूत होता दिख रहा है। हालांकि विरोधी खेमे में शामिल नेताओं के बीच अपने कद की लड़ाई की संभावना अब भी बरकरार है।

गौरतलब हो कि बीजेपी के लिए पीएम पद का दावेदार अकेले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी है, जबकि विरोधी खेमे की ओर से बसपा प्रमुख मायावती पहले ही पीएम बनने की इच्छा जाहिर कर चुकी हैं, जबकि कांग्रेस के नेतृत्व में सरकार बनने पर राहुल राहुल गांधी के पीएम बनने की भी प्रबल संभावना है। वहीं हाल के दिनों में ममता बनर्जी और चंद्रबाबु नायडू ने जिस तरह से देश की राजनीति में अपने आप को पेश किया है, उससे ऐसा प्रतित होता है कि ये नेता भी पीएम की रेस में हैं। जबकि इधर बीजेपी का दावा है कि उसे 300 सीटें मिल रही है और भाजपा को अकेले सरकार बनाने का अवसर मिल रहा है। ऐसे में फिलहाल कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी।

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