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टूट गया बुआ-बबुआ का ऐतिहासिक रिश्ता? माया के फैसले ने मचाई खलबली

नई दिल्ली: लोकसभा चुनाव में बीजेपी की बंपर जीत और अपनी शर्मनाक हार से खलबलाई विपक्षी खेमे में लगतार मंथन का दौर जारी है। चुनाव बाद मोदी सरकार को सत्ता से उखाड़ फेंकने के दावों की हवा निकले के बाद एक ओर कांग्रेस पार्टी की बुनियाद हिल चुकी है, तो वहीं यूपी में मोदी को रोकने के लिए पुश्तैनी दुश्मीन भूलाकर साथ आए बुआ-बबुआ के राह भी अलग होते दिख रहे हैं।

राजधानी दिल्ली में सोमवार को हुई बीएसपी की बैठक में मायावती ने हार के कारणों पर मंथन किया। बैठक में शामिल करीबी सूत्रों की माने तो मायावती ने अपनी हार का ठिकरा समाजवादी पार्टी पर फोड़ा है। बैठक में मायावती ने कहा कि गठबंधन से बसपा को कोई फायदा नहीं हुआ। यादवों का वोट बीएसपी के खाते में ट्रांसफर नहीं हुआ और जाटों के वोट भी नई मिले।

मंथन बैठक में माया के तेवर इस ओर इशारा करते हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सत्ता से रोकने के लिए यूपी में बना महागठबंधन अंतिम सांस ले रहा है। सूत्रों के मुताबिक उत्तर प्रदेश की 11 विधानसभा सीटों पर होने वाले उपचुनाव में मायावती की पार्टी अखिलेश के साथ नहीं बल्कि अकेले चुनाव लड़ेगी।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि लोकसभा चुनाव से पहले भारी तामझाम के साथ अखिलेश यादव की समाजवादी पार्टी, मायवती की बहुजन समाज पार्टी और अजित सिंह की आरएलडी ने महागठबंध का फैसला किया था। जिसके तबत प्रदेश की 80 सीटों पर हुए समझौते में बसपा को 38 तो को 37 सीटें और तीन सीट आरलडी को मिले थे। चुनाव से पहले महागबंधन में शामिल दलों ने 50 से अधिक सीटें जीतने का दावा किया था। लेकिन चुनावी परिणाम ने विपक्ष के अरमानों पर पानी फेर दिये। गठबंध में शामिल तीनों दल महज 10-15 सीटों पर ही सिमट गई। जिसके बाद से ही ऐसे कयास लगाए जा रहे थे कि महागठबंध का अस्तिव अधर में है। 

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