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सैकड़ों सैन्य अफसरों ने खोला सरकार और सेना के खिलाफ मोर्चा, लगाया यह बड़ा आरोप

नई दिल्ली: भारतीय सेना के करीब 100 अफसरों ने प्रमोशन में भेदभाव सहित कई अन्य मामलों को लेकर सुप्रीम कोर्ट (एससी) का दरवाजा खटखटाया है। यह सेना के अफसर सर्विसेज कोर से हैं, इन्होने अपने साथ भेदभाव और नाइंसाफी के लिए एससी की शरण ली है।

बतादें कि भारतीय सेना के 100 से ज्यादा अफसरों ने भेदभाव और अपने साथ ही रही नाइंसाफी के एससी का रुख किया है। सेना के इन अफसरों में सर्विसेज कोर के लेफ्टिनेंट कर्नल और मेजर भी शामिल हैं। एक मीडिया रिपोर्ट की माने तो इन अफसरों ने एससी में याचिका दायर कर अपने खिलाफ होने वाली नाइंसाफी और भेदभाव को लेकर एससी से गुहार लगाते हुए कहा है कि एससी सेना और केंद्र सरकार को इस संबंध में आदेश दे।

याचिका में कहा गया है कि सर्विसेज कोर के जवानों को भी ऐसी ही चुनौतियों से जूझना होता है जैसा कि कॉम्बैट ऑर्म्स कोर के अफसर सामना करते हैं। याचिका में पूछा गया है कि कॉम्बैट ऑर्म्स के अफसरों को जिस तरह का प्रमोशन दिया जा रहा है, उससे उन्हें (सर्विसेज कोर) क्यों वंचित रखा जा रहा है। साथ ही याचिका में मांग की गयी है कि जब तक प्रमोशन में समानता न लाई जाए तब तक सर्विसेज कोर के जवानों को कॉम्बैट ऑर्म्स के साथ तैनात न किया जाए। मालूम हो कि सेना में कई श्रेणी होती हैं उन्हीं में सर्विसेज कोर और कॉम्बैट कोर भी हैं।

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किसी भी आपरेशन के दौरान जरुरत पड़ने पर सर्विसेज कोर के जवानों को भी मोर्चा संभालना पड़ता है, लेकिन दूसरी ओर प्रमोशन आदि के मामले में इनके साथ भेदभाव किया जाता है। ऐसे में कहा गया है कि जवानों का मनोबल गिर रहा है। साथ ही देश की सुरक्षा भी प्रभावित हो रही है। एससी में यह याचिका लेफ्टिनेंट कर्नल पी के चौधरी की अगुवाई वाले दल ने दायर की गई। याचिका में कहा गया है कि उनके साथ लम्बे समय से भेदभाव किया जा रहा है उबनके सभी काम कॉम्बैट कोर वाले कराये जाते है लेकिन प्रमोशन के वक्त उन्हें नॉन आपरेशनल मान लिया जाता है।

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