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अवैध बांग्लादेशियों का मुद्दा उठानी वाली ममता कैसे बन गयी उनकी समर्थक

नई दिल्ली: आपको जानकार हैरानी होगी कि असम में नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजन्स (एनआरसी) ड्राफ्ट का सबसे ज्यादा विरोध करने वाली ममता बनर्जी खुद वेस्ट बंगाल में अवैध बांग्लादेशियों का मुद्दा उठाते हुए इस्तीफा भी दे चुकी हैं। लेकिन महज कुछ ही वर्षों में ममता में इतना बदलाव का गया है कि वह अब इसकी समर्थक हो गयी है।

दरअसल असम में लागू किये गये नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजन्स ड्राफ्ट यानी की एनआरसी का विरोध करने वाली ममता के बारे में एक मीडिया ने उनकी ही पुरानी खबर का हवाला देकर छापा है कि साल 2005 में आज की ममता बनर्जी ने खुद वेस्ट बंगाल में बांग्लादेशी घुसपैठियों का मुद्दा उठाते हुए लोकसभा के स्पीकर की तरफ कागज फेंक कर इस्तीफा तक दे दिया था। बात यह 4 अगस्त, 2005 की है। ममता सांसद हुआ करती थी। और बंगाल में उनकी पार्टी विपक्ष में बैठी थी।

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राज्य में सीपीएम की सरकार थी और मुद्दा अभी के जैसा बंगलादेशी अवैध घुसपैठ का था। खबर के अनुसार लोकसभा में ममता बनर्जी बंगलादेशी घुसपैठ का मुद्दा उठाना चाहती थी, लेकिन उन्हें तत्कालीन लोकसभा स्पीकर सोमनाथ चटर्जी ने इजाजत नहीं दी। जिससे गुस्से ममता ने कुछ कागज़ के टुकड़े उस समय सदन की अध्यक्षता डिप्टी स्पीकर चरणजीत सिंह अटवाल की तरफ फेंक दिए। इसके बाद ममता ने कहा कि, 'जब भी मैं इस मसले को उठाना चाहती हूं, मुझे बोलने नहीं दिया जाता।

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इस सदन की सदस्य होने के नेता मेरा यह अधिकार है कि अपनी जनता की आवाज उठाऊं।'  वहीँ सदन में नाराज हुई ममता ने डिप्टी स्पीकर को अपना इस्तीफा सौंप दिया और सदन से बाहर चली गईं। हालाँकि उनका इस्तीफा तकनीकी कारणों से नामंजूर हो गया है। लेकिन अब सवाल यह है कि बंगलादेशी घुसपैठियों का मुद्दा उठानी वाली ममता बनर्जी उसका समर्थन क्यों करने लगी? हालाँकि इसका बड़ा राजनीतिक कारण भी हो सकता है।  

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