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आखिरी वक्त पर बोलीं दीदी- ‘मोदी जी SO सॉरी’

नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल नहीं होंगी। इससे पहले 30 मई को शपथ ग्रहण समारोह में आने का न्योता उन्होंने स्विकार कर किया था। लेकिन ऐन वक्त पर ममता ने ‘शपथ पर सियासत’ का आरोप लगाते हुए यू टर्न ले लिया।

अपनी मन की बात जाहिर करते हुए ममता ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट किया है। अपने पोस्ट में ममता ने अपने बयान की प्रति के साथ-साथ पीएम मोदी को लिखा खत भी साझा किया है। अपने बयान में ममता कहती हैं, शपथ ग्रहण लोकतंत्र की महत्वपूर्ण परंपरा है, लेकिन इसे राजनीतिक फायदे के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है।

पीएम मोदी पर गंभीर आरोप थोपते हुए ममता ने कहा कि, शपथ ग्रहण लोकतंत्र के उत्सव का जश्न मनाने के लिए पवित्र मौका होता है। लेकिन इस मौका का इस्तेमाल किसी दूसरी पार्टी को महत्वहीन बनाने या उसे नीचा दिखाने के लिए नहीं किया जाना चाहिए। हालांकि तल्ख भाषा में ही सही लेकिन ममता ने अपने खत में पीएम मोदी को जीत की बधाई जरूर दी है।

पीएम मोदी को शुभकामनाएं देते हुए ममता लिखती है, नये प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी आपको बधाई! 'संवैधानिक आमंत्रण' पर मैंने शपथ ग्रहण में शामिल होने का फैसला किया था। लेकिन बीते कुछ घंटे में मीडिया रिपोर्ट में मैंने देखा कि बीजेपी दावा कर रही है कि बंगाल में 54 राजनीतिक हत्याएं हुई हैं।

बीजेपी के आरोपों को निराधार बताते हुए ममता कहती है, यह पूरी तरह से झूठ है। बंगाल में कोई राजनीतिक हत्या नहीं हुई है। ऐसा संभव है कि ये हत्याएं पुरानी रंजिश, पारिवारिक झगड़े या फिर किसी और कारण से हुई होगी, लेकिन इसका राजनीति से कोई नाता नही है। हमारे रेकॉर्ड में ऐसा कुछ भी नही है। इसलिए, मैं क्षमा चाहती हूं, कृप्या मुझे क्षमा करें।

आपको बता दें कि बीजेपी चुनावी चर्चाओं के क्रम से ही बंगाल में अपने कार्यकर्ताओं की हत्या के लिए ममता बनर्जी और टीएमसी कार्यकर्ताओं पर आरोप लगाती रही है। वहीं खबर है कि बीजेपी ने मोदी के शपथ ग्रहण में मारे गए कार्यकर्ताओं के परिजनों को भी आमंत्रित किया है। जिसे ममता खुद के खिलाफ षडयंत्र और शपथ पर सियासत मान रही है।

हालांकि यह पहला मौका नहीं है जब ममता ने मोदी के शपथ ग्रहण में शामिल होने से मना किया है। बल्कि इससे पहले साल 2014 में जब मोदी पहली बार पीएम पद की शपथ ले रहे थे तब भी ममता को निमंत्रण भेजा गया था। लेकिन वह किसी कारण शामिल नहीं हुई थीं। हालांकि उन्होंने अपने करीबी अमित मित्रा और मुकुल रॉय को उन्होंने प्रतिनिधि के तौर पर भेजा था। लेकिन आज परिस्थितियां भिन्न है।

पिछली बार ममता की जगह मोदी के शपथ ग्रहण में शामिल होने वाले मुकुल रॉय अब बीजेपी सक्रिय सदस्य है। जबकि एक दिन पहले ही उनके बेटे ने भी बीजेपी का दामन थाम लिया है। वहीं साल 2014 के मुकाबले साल 2019 में ममता की राजनीति ताकत भी कमजोर हुई है। और इसमें कोई संदेह नहीं कि ममता की कमजोरी का जिम्मेदार मोदी-शाह और बीजेपी है।

गौरतलब हो कि 2014 के चुनाव में देश भर में चल रही मोदी लहर बंगाल की सीमा नहीं लांघ सकी थी। और राज्य में बीजेपी को महज दो सीटों से ही संतोष करना पड़ा था। लेकिन इस बार मोदी की सुनामी ने बंगाल में ममता की सारी बंदिशें तोड़ते हुए 18 सीटें हासिल कर ली। जिससे ममता की परेशानी लाजमी है।

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