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मुसलमानों को जिंदा रहने के बदलना ही होगा नाम, जानिए क्या कहते हैं MP के अधिकारी

भोपाल: आगरा का हामिद अंसारी, राजस्थान का पहलु खान और झारखंड का तबरेज, ये सभी न्यू इंडिया के उस दर्दनाक परंपरा का उदाहण है जिसे आधुनिक भारत में मॉब लिंचिंग कहते हैं, ये सब हिंसक भीड़ की भेंट चढ़ चुके हैं, लेकिन इनकी यादे आज भी दिल दहला जाती है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भले ही सब का साथ सबका विकास के बाद अब सबका विश्वास जीतने की बात करते हैं, लेकिन इसकी हकीकत भारत की संप्रभूता की नींब हिला रही है। ये तस्वीरें मध्य प्रदेश के एक वरिष्ठ अधिकारी नियाज खान की है, जो पिछले 13 साल में 20 बार तबादले का दंश झेल चुके हैं।

नौकरशाही में भ्रष्‍टाचार पर दो किताबें लिखने वाले नियाज का मिजाज पूरी तरह से बदल चुका है, बदलाव का आलम यह है कि नियाज अपने लिए एक नया पहचान तलाश रहे हैं। नियाज को अपने लिए एक ऐसे नाम की तलाश है जो उनकी पहचान छिपा सके। इसके लिए उन्होंने एक के बाद एक कई ट्वीट भी किए हैं।

उप सचिव स्तर के अधिकारी नियाज खान ने मॉब लिंचिंग की घटनाओं पर चिंता जताते हुए ट्वीट किया, मैं अपनी पहचान छिपाने के लिए नया नाम ढूंढ रहा हूं। नया नाम मुझे हिंसक भीड़ से बचाएगा। अगर मेरे पास कोई टोपी, कोई कुर्ता और कोई दाढ़ी नहीं है तो मैं भीड़ को अपना नकली नाम बताकर आसानी से निकल सकता हूं। हालांकि, अगर मेरा भाई पारंपरिक कपड़े पहन रहा है और दाढ़ी रखता है तो वह सबसे खतरनाक स्थिति में है।

एक अन्य ट्वीट में नियाज ने अलग-अलग संस्थाओं पर सवाल उठाते हुए लिखा, ‘क्योंकि कोई भी संस्थान हमें बचाने में सक्षम नहीं है, इसलिए नाम को स्विच करना ही बेहतर है। मेरे समुदाय के बॉलिवुड अभिनेताओं को भी अपनी फिल्मों की सुरक्षा के लिए एक नया नाम ढूंढना शुरू करना चाहिए। अब तो टॉप स्टार्स की फिल्में भी फ्लॉप होने लगी हैं। उन्हें इसका अर्थ समझना चाहिए।

आपको बता दें कि सामाजिक तौर पर सरकारी अधिकारी का वक्तव्य अखंड भारत की गरीमा को आहत कर सकता है, लेकिन इसमें कोई संदेह नहीं कि देश के अलग-अलग हिस्सों से आय दिन आ रही मॉब लिंचिंग की घटनाए अंख़डत भारत और भारतीयता के लिए खतरे की घंटी बजा रहा है। अगर इसे समय पर नहीं समझ सके तो फिर अब पछतात का होत जब चिड़ियां चुग गई खेत।

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