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पॉइंट टू पॉइंट: नीतीश के सामने लालू का सरेंडर- जाने 28 बड़ी बातें…

पटना: बिहार में महागठबंधन टूटने के बाद से ही जेडीयू और आरजेडी में तना-तनी के साथ आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी जारी है। लालू और कांग्रेस का छोड़कर भाजपा शामिल हो कर नई NDA सरकार की गठन के बाद सोमवार को सीएम नीतीश कुमार मीडिया के सामने आकर लालू की पोल खोल दी तो इस कड़ी को आगे बढ़ाते हुए सोमवार को लालू यादव ने भी नीतीश कुमार पर जोरदार हमला बोला।

आरजेडी प्रमुख लालू यादव ने नीतीश कुमार पर करारा हमला करते हुए उन्होंने राजनीति का पलटूराम करार दिया। मीडिया को संबोधित करते हुए लालू यादव ने जेपी आंदोलन से लेकर बाबरी मस्जिद तक का जिक्र करते हुए नीतीश कुमार को निशाने पर लिया और कई तरह के गंभीर आरोप भी लगाए।

आइए जानते हैं लालू के नीतीश के लिए मंगलवार को मीडिया को संबोधित करते हुए क्या-क्या कहा...

नीतीश पर मुझे कभी भरोसा नहीं था, उन्हें मैं शुरू से ही जानता हूं, वो राजनीति के पलटूराम हैं

नीतीश ने कल कहा कि मैंने लालू को बनाया,जबकि मैं उनसे बड़ा नेता हूं

मैंने नीतीश कुमार को आगे बढ़ाया

लोकसभा चुनावों में नरेंद्र मोदी के खिलाफ बोलते थे, आज उन्हीं की गोद में जाकर बैठ गए

नीतीश मेरे बेटे की राजनीतिक बलि देना चाहते थे

तेजस्वी के अच्छे कामों से डर गए थे नीतीश

नीतीश मुझे जाति का नेता बताते हैं तो क्यों वो खुद कुर्मी सम्मेलन में गए थे

मैं कभी यादव सम्मेलन में नहीं गया हूं

नीतीश को शरद यादव ने बनाया, टिकट दिया

नीतीश को जीताने में शरद यादव ने अपनी जान लगा दी

एक समय था जब नीतीश कुमार मुझसे चंदन लगवाकर जाते थे

जेपी आंदोलन के समय नतीश का कोई अता-पता ही नहीं था

उस वक्त मैंने नीतीश कुमार को आगे लाया, मैंने नीतीश के लिए बहुत कुछ किया

1992 में बाबरी मस्जिद ध्वस्त हुआ मतलब भारत का संविधान ध्वस्त हुआ

भारत की भाईचारे को भाजपा और आरएसएस ने ध्वस्त किया

1994 में मुंबई में बीजेपी का सम्मेलन हुआ, तब समता पार्टी भी बन चुकी थी

लेकिन नीतीश कुमार का हाथ पकड़कर आडवानी जी सम्मेलन में ले गए थे

नीतीश का राजनीतिक चरित्र जग जाहिर है, वो पलटूराम नीतीश हैं

नीतीश झूठ बोला की मैंने उन्हें जहर बोला था

मैं दिल्ली में ही नीतीश को नेता मानने के खिलाफ था

लेकिन मुलायम सिंह यादव के कहने पर माना था, उन्होंने ही इसकी घोषणा की

नीतीश कुमार आज अपनी हैसियत भूल गए हैं

1989 में चुनाव हारने के बाद हाथ जोड़ कर नीतीश कुमार मेरे पास आए थे

नीतीश कुमार 2-2 बार 1977 और 1980 में विधायकी का चुनाव हारे

नीतीश कुमार आदर्शवाद झूठा है, वो कहते हैं कि उनका वोट मुझे मिला

लोकसभा चुनाव में सिर्फ दो सीट पाए थे

राज्यसभा चुनाव में हम सपोर्ट नहीं करते तो उनकी हवा निकल जाती

बिहार की जनता 2019 में नीतीश कुमार को जवाब देगी

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