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एक और ऐतिहासिक बदलाव की ओर मोदी सरकार- लोकसभा में पेश हुए विधेयक

दिल्ली: संसद के मॉनसून सत्र के दौरान आज केंद्र की मोदी सरकार ने लोकसभा में मजदूरी संहिता विधेयक 2017 पेश कर दिया है। सरकार के श्रम एवं रोजगार मंत्री बंडारु दत्तात्रेय ने इसे पेश किया है। इस विधेयक के तहत केंद्र को न्यूनतम मजदूरी तय करने का अधिकार दिया गया है।

जानकारों के अनुसार इस विधेयक को मंजूरी मिलने के बाद इसका फायदा असंगठित क्षेत्र के 40 करोड़ मजदूरों को हो सकता है, जिन्हें फिलहाल कोई देखने वाला भी नहीं है कि ऐसे मजदूरों का घर-परिवार कैसे चल रहा है। बता दें कि आज भी देश में ऐसे लोगों की कोई कमी नहीं है कि अगल वो एक दिन काम नहीं करता है तो उसके परिवार को रात में भूखे पेट ही सोना पड़ेगा।

सरकार द्वारा पेश गए इस विधयेक में चार कानूनों (मजदूरी संदाय अधिनियम 1936, न्यूनतम मजदूरी अधिनियम 1948, बोनस संदाय अधिनियम 1965 और समान पारिश्रमिक अधिनियम 1976) को सरल और सुव्यवस्थित बनाने का प्रस्ताव किया गया है। जिसे पेश करते हुए सरकार के मंत्री ने बताया कि इस विधयेक का मकसद है कि श्रम अधिनियमितियों को सरल और व्यवस्थित बनाया जा सके।

मंत्री के अनुसार इसके पास होने के बाद किसी भी हालत में मजदूरों के अधिकारों का हनन नहीं किया जा सकता। यह श्रमिकों की मजदूरी के संदर्भ में ऐतिहासिक बदलाव लाने फैसला होगा और देश में पहली बार विश्वव्यापी न्यूनतम मजदूरी लागू किए जाने का रास्ता साफ होग।

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